कानपुर देहात। बलरामपुर के पनवापुर उतरौला के शफीक को सड़क हादसा न भूलने वाला गम दे गया। लॉकडाउन में फंसा परिवार घर वापसी को निकला तो शफीक व उसका भाई आजम अली बेहद खुश थे। घर कब आएगा यह सवाल चार वर्षीय बच्ची सौमैया बार-बार चाचा से आजम से पूछ रही थी। वह उसे दिलासा देता कि जल्द ही घर आएगा। इसी बीच हादसा हो गया।
सौमैया की मौत पर परिवारी बिलख पड़े। आजम अली मृत सौमैया को गोद में लेकर काफी देर अस्पताल में दीवार पर टेक लगाकर बैठा रहा। बीच-बीच में वह कहता कुछ तो बोलो, आंखें खोलो सौमैया, अब घर आने वाला है। वहां तुम खूब खेलना, अब कोई नहीं रोकेगा। यह देखकर स्वास्थ्य व पुलिस कर्मियों की भी आंख भर आई। वहीं संत कबीर नगर, मुसायरा निवासी रीमा, उसकी तीन वर्षीय बेटी श्रद्धा, पांच वर्ष की प्रज्ञा घायल हो गई। दर्द से कराहते बच्चों को जल्द ठीक होने का ढांढस बंधाती रीमा खुद अपना दर्द छिपाती रही।
चीख-पुकार के बीच अपनों को तलाशते रहे घायल
कानपुर देहात। लॉकडाउन में फंसे प्रवासी मजदूर के मन में जल्द घर पहुंचने की खुशी थी। सुबह कुछ उसनीदें से थे, तो कुछ बच्चों को संभाल रहे थे। कष्ट भरी यात्रा के बीच हादसा हुआ तो सामान बिखरने के साथ लोग सड़क पर जा गिरे। चीख-पुकार के बीच घायल अपनों की तलाश करते रहे।
तड़पते रहे घायल, एंबुलेंसों के लिए लखनऊ से ली अनुमति
कानपुर देहात। जिला अस्पताल अकबरपुर तक घायलों को लाने के लिए भी एंबुलेंसों का टोटा रहा। घायल महिलाएं, बच्चे व पुरुष आधा घंटे तक तड़पते रहे। जिला अस्पताल व सीएचसी से सिर्फ तीन 108 एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंची। की संख्या आधा सैकड़ा से अधिक होने के कारण जिला अस्पताल में ही खड़ी 102 एंबुलेंस भेजने की मांग की गई, लेकिन 102 एंबुलेंस का इस्तेमाल जननी सुरक्षा के तहत सिर्फ महिलाओं को लाने व ले जाने में किए जाने के कारण समस्या खड़ी हो गई। इस पर अफसरों ने एंबुलेंस के लखनऊ मुख्यालय से विशेष अनुमति ली। इसके बाद पांच 102 एंबुलेंस व दो एएलएस एंबुलेंस घटनास्थल पर भेजी गई। एंबुलेंस प्रभारी आदित्य सक्सेना ने बताया कि जिले में 108 की कुल 24, 102 की 28 व तीन एएलएस एंबुलेंस हैं, जो विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात हैं। जिला अस्पताल व सीएचसी अकबरपुर में सिर्फ तीन 108 व दो एएलएस एंबुलेंस थी।