कानपुर। कानपुर आर्थोपेडिक सिम्पोजियम का आयोजन रविवार को सिविल लाइंस स्थित होटल में किया गया। यहां विशेषज्ञों ने बढ़ते हड्डी रोगों पर चिंता जाहिर की और सावधानी बरतने की सलाह दी गई। संगोष्ठी में घुटनों, कूल्हों, रीढ़ और कंधों से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की गई। मुख्य वक्ता विशेषज्ञ डॉ. विक्रम शाह ने बताया कि आरामतलबी भरी जिंदगी जीने के चलते हड्डियों और जोड़ों में परेशानियां बढ़ रही हैं।
कहा कि लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और कंप्यूटर का अत्यधिक उपयोग, गलत पॉश्चर तथा अनियमित दिनचर्या युवाओं को भी कम उम्र में कमर दर्द, गर्दन दर्द और घुटनों की समस्याओं की ओर धकेल रही है। लोग अक्सर शुरुआती जोड़ों या कमर दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं जिससे समस्या आगे चलकर गंभीर रूप ले लेती है और उपचार अधिक जटिल हो जाता है। जागरूकता, समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार हड्डियों और जोड़ों की समस्याओं से बचाव के लिए बेहद आवश्यक है। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि फिजियोथैरेपी से रोगियों को सर्जरी की नौबत तक पहुंचने से बचाया जा सकता है। ग्लोबल ओपीडी डायरेक्टर डॉ. भरत गज्जर ने बताया कि बढ़ता स्क्रीन टाइम, घंटों बैठकर काम करने की आदत, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं का बड़ा कारण बनते जा रहे हैं। पहले जहां घुटनों, रीढ़ और कूल्हों की समस्याएं मुख्यतः बुजुर्गों में देखी जाती थीं, वहीं अब 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी ये समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डॉ. दर्शिनी शाह ने दर्द रहित रूट कैनाल, इंप्लांट को लेकर जानकारी दी। इस मौके पर कानपुर और लखनऊ के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।