कानपुर। नौबस्ता में बाइक की मामूली रगड़ ने कुछ ही मिनटों में दो परिवारों को बर्बाद कर दिया। सड़क पर हुई साधारण कहासुनी इतनी बढ़ी कि पिता-पुत्र की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। अब एक घर में मातम पसरा है तो दूसरे परिवारों के सामने गिरफ्तारी के बाद मुकदमे का खर्च और कचहरी के चक्कर लगाने का बोझ आ पड़ा है।
रविवार शाम को घटनास्थ्ल के पास मौजूद रहे लोगों के मुताबिक दोनों पक्ष सामान्य परिवारों से थे। कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। विवाद सिर्फ बाइक टकराने से शुरू हुआ था लेकिन गुस्से ने हालात हिंसक बना दिए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बहस के दौरान जिस तेजी से हमला हुआ उसने सभी को दहला दिया। बुजुर्ग दुकानदार ने बताया कि पहले सड़क पर छोटे-मोटे विवाद बातचीत से खत्म हो जाते थे लेकिन अब युवाओं में धैर्य तेजी से कम हो रहा है।
मामूली बात पर मारपीट और हथियार निकालना आम होता जा रहा है। इसके पीछे लगातार हिंसक कंटेंट देखने की प्रवृत्ति को भी लोग बड़ी वजह मान रहे हैं। वेबसीरीज और सोशल मीडिया पर दिखाए जाने वाले हिंसक दृश्य युवाओं की सोच और व्यवहार पर असर डाल रहे हैं। कई चर्चित वेबसीरीज में गाली-गलौज, बदला और हत्या को आक्रामक अंदाज में दिखाया जाता है। धीरे-धीरे यह छवि युवाओं के दिमाग में सामान्य व्यवहार की तरह बैठती जा रही है।
सहायक मनोवैज्ञानिक संध्या शुक्ला के अनुसार लगातार हिंसक दृश्य देखने से गुस्से पर नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है खासकर ऐसा किशोर और युवा उम्र में होता है। जब संयम की जगह आक्रामकता हावी हो जाए तो सड़क पर हुई मामूली रगड़ भी जानलेवा बन जाती है। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि समाज के बदलते स्वभाव की चेतावनी है।