कानपुर। पद्मश्री गिरिराज किशोर स्मृति संस्थान की ओर से हरिहरनाथ शास्त्री भवन में बुधवार को उनकी जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ गांधीवादी, समाजसेवी और साहित्यकारों ने उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने आईआईटी कानपुर में गिरिराज किशोर शोध पीठ स्थापित करने की मांग उठाई। कार्यक्रम में बताया गया कि मुजफ्फरनगर में जन्मे गिरिराज किशोर ने 1960 में आगरा विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की। उत्तर प्रदेश सरकार में सेवा के बाद उन्होंने स्वतंत्र लेखन शुरू किया। वे कानपुर विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव व उप कुलसचिव रहे और बाद में आईआईटी कानपुर के कुलसचिव बने। उन्होंने सेंटर फॉर क्रिएटिव राइटिंग की स्थापना की। उनके उपन्यास पहला गिरमिटिया और ढाई घर विशेष रूप से चर्चित रहे। 2007 में राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दीपक मालवीय और संचालन सुरेश गुप्ता ने किया। इस मौके पर आशीष त्रिपाठी, मदनमोहन शुक्ला, नौशाद आलम मंसूरी, आरती वर्मा, डॉ. राधेश्याम मिश्रा शामिल रहे। (संवाद)