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यहां 40 साल पहले मरे व्यक्ति का हड़पा 76 लाख मुआवजा

Fri, 25 May 2018 05:02 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोर्ट से फर्जीवाड़ा करने पर विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट के रीडर ने कोतवाली थाने में दी तहरीर
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डेमाे पिक
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विस्तार
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यूपी के कानपुर शहर में एक एेसा मामला सामने आया है जिसे देखकर इंसानियत शर्मसार हो जाएगी। मरे हुए व्यक्ति के नाम से बैंक में फर्जी खाता खुलवाकर, वकील के माध्यम से फर्जी शपथपत्र कोर्ट में दाखिल कर एक व्यक्ति के हिस्से की 76 लाख रुपये मुआवजा राशि हड़प ली गई।
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मामला तब खुला जब मृतक का पौत्र कोर्ट पहुंचा। बताया गया कि जिनके नाम से राशि हड़प ली गई है वह 40 साल पहले ही मर चुके हैं। मामला जान विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट अजय कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर रीडर रमनलाल सैनी ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज करने को तहरीर दी है।

कई साल पहले कल्याणपुर-पनकी एक्सपेंशन एंड ग्रीन बेल्ट स्कीम 40 के लिए ग्राम पनकी की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। लेकिन कुछ भूस्वामी मुआवजा राशि लेने नहीं आए। एडीएम (भूमि अध्याप्ति) ने जिला जज की कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर कहा कि जब लाभार्थी आएं तो उन्हें नियमानुसार मुआवजा राशि अदा कर दी जाय। इसके साथ ही उन्होंने न्यायालय में लाभार्थियों की सूची और मुआवजा राशि जमा कर दी।
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इसी सूची में रामचरन भी था। जिसके नाम 76,42,656 रुपये मुआवजा आवंटित था। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत में 18 अक्टूबर 2016 को रामचरन नाम से शपथपत्र के साथ एक प्रार्थना पत्र दिया गया कि मुआवजा राशि दे दी जाए। कोर्ट ने एडीएम (भूमि अध्याप्ति) से रिपोर्ट मांगी। एडीएम ने डीजीसी सिविल के माध्यम से कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुति कर दी कि रामचरन का मुआवजा अभी नहीं उठा है। इसपर कोर्ट ने ई पेमेंट से रामचरन के खाते में राशि भुगतान का आदेश कर दिया। राशि का भुगतान भी हो गया। रामचरन के नाम से आईडीबीआई बैंक सुजानपुर पनकी में फर्जी खाता भी खोला गया था। जिसकी पास बुक कोर्ट में जमा की गई थी।

ग्राम व पोस्ट दूल सचेंडी के रहने वाले रामकृष्ण कोरी और रामजानकी ने कोर्ट में शिकायत की थी कि रामचरन की मृत्यु 40 साल पहले ही हो चुकी है। कोर्ट ने शिकायतकर्ता रामकृष्ण, रामजानकी, लाभार्थी रामचरन व उसके अधिवक्ता कमलापति मिश्रा को नोटिस भेजी। नोटिस पाकर रामचरन के पौत्र पतिराखन और लखनलाल कोर्ट में हाजिर हुए और रामचरन का मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाते हुए कहा कि उनकी मृत्यु 1 सितम्बर 1983 को हो चुकी है। फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर कोर्ट ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
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