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Kanpur News: 500 प्रतिशत टैरिफ लगा तो खत्म हो सकता है अमेरिका को निर्यात

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कानपुर। अमेरिका ने रूस के साथ तेल खरीद जारी रखने पर भारत पर 500 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इस संबंध में विधेयक लाने की भी बात कही जा रही है। इससे शहर के निर्यातकों ने गहरी चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि यदि 500 प्रतिशत टैरिफ लगता है तो कानपुर से पूरी तरह से अमेरिका को निर्यात खत्म हो जाएगा। पिछले साल 27 अगस्त से 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था। इससे अमेरिका के निर्यात में पहले ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अभी भी शहर से सैडलरी और हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात किया रहा था। नए टैरिफ से ये निर्यात भी पूरी तरह से ठप होने की आशंका जताई गई है।
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वित्तीय वर्ष 2025-26 के शुरूआती 6 महीनों में शहर से 4287.25 करोड़ का निर्यात किया गया है। अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का असर शहर के चमड़ा, टेक्सटाइल, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग, सब्जी मसाला कारोबार पर पड़ा है। उन निर्यातकों के सामने ज्यादा संकट आ गया है। जो केवल अमेरिकी कंपनियों या खरीदारों के साथ कारोबार करते चले आ रहे हैं। इनकी इकाइयों में उत्पादन कम हो गया है। उत्पादन कम होने से सप्ताह में केवल चार दिन ही श्रमिकों-कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है। जबकि अन्य इकाइयों में सप्ताह में पांच दिन काम हो रहा है। यानी कि अलग-अलग उद्योग अब अधिकतम सप्ताह में पांच दिन ही चल रहे हैं। हैंडीक्राफ्ट उत्पादों में भी एक शिफ्ट में काम हो रहा है।
अमेरिका को बीते तीन सालों में निर्यात तेजी से बढ़ रहा था। शहर से 2500 करोड़ का निर्यात पिछले साल किया गया था। इसमें 1200-1300 करोड़ की अकेले हिस्सेदारी केवल चमड़ा कारोबार की थी। जबकि टेक्सटाइल, हैंडलूम उत्पादों की हिस्सेदारी का आंकड़ा 500-600 था। टैरिफ लगने के बाद से वहां की कंपनियों और खरीदारों ने ऑर्डर निरस्त कर दिए थे। अब अमेरिका ने 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी है। इससे
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अमेरिका के साथ जल्द मुक्त व्यापार समझौता होने की प्रक्रिया पर फिर से संकट के बादल मंडराने लगे हैं। निर्यातकों का कहना है कि अमेरिका के कारोबारियों के साथ रिश्ते बनाए रखना मुश्किल होगा।
500 प्रतिशत टैरिफ से कानपुर का उत्पाद अमेरिकी बाज़ार में छह गुना महंगा हो जाएगा। लेदर और गारमेंट जैसे संवेदनशील उत्पाद बिकना बंद हो जाएंगे। अमेरिकी आयातक वियतनाम, बांग्लादेश, मैक्सिको जैसे देशों से खरीद शुरू कर देंगे। इससे सभी ऑर्डर निरस्त होंगे। निर्यात इकाइयां, छोटे-छोटे कारखाने टिक नहीं पाएंगे। मजदूरों की नौकरी खतरे में होने की संभावना होगी। फुटवियर और सैडलरी मे मुनाफा बहुत कम होता है। टैरिफ का बोझ सहना असंभव होगा। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड सप्लायर बदल देंगे। टेक्सटाइल और गारमेंट्स की इकाइयों की घरेलू सप्लाई चेन और पूरा स्थानीय इकोसिस्टम प्रभावित होने की संभावना होगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2 अप्रैल को भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। जो 9 अप्रैल से प्रभावी होना था। हालांकि बाद में इसे 90 दिनों तक स्थगित कर दिया गया। बाद में ये 9 जुलाई से प्रभावी किया जाना था। फिर इसे 30 जुलाई तक बढ़ा दिया गया। एक अगस्त को रूस से तेल खरीदने पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। जो 7 अगस्त से प्रभावी होना था। फिर इसे 27 अगस्त कर दिया गया। और 28 अगस्त की सुबह से 50 प्रतिशत टैरिफ भारत पर लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया।

बीते सालों में अमेरिका को कानपुर से निर्यात
वित्तीय वर्ष 2022-23: 1600 करोड़
वित्तीय वर्ष 2023-24: 1900 करोड़
वित्तीय वर्ष 2024-25: 2500 करोड़
वित्तीय वर्ष 2025-26: 800-900 करोड़ (अप्रैल से अगस्त 2025 तक)
इन देशों के साथ हो चुका समझौता
अमेरिका के टैरिफ प्रभाव को कम करने और निर्यात बढ़ाने की दिशा में सरकार लगातार विश्व के अलग-अलग देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रही है। भारत-न्यूजीलैंड समझौता हाल में ही पूरा हुआ। इसी तरह ओमान के साथ समझौता किया गया। भारत-यूके, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच समझौता किया जा चुका है।

उच्च-प्राथमिकता वाले इन देशों के साथ चल रही बातचीत

भारत-कनाडा, भारत-पेरू, भारत- गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल जिसमें सऊदी अरब, कतर, कुवैत और बहरीन के साथ एक ब्लॉक-व्यापी समझौता तैयार किया जा रहा है। भारत-इस्राइल, भारत-यूरोपीय यूनियन, भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान सहित रूस के साथ बातचीत नवंबर 2025 में शुरू हुई है। इसके अलावा भारत-दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ के साथ बातचीत की जा रही है।

बातचीत
500 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगने से शहर का अमेरिका को निर्यात लगभग समाप्त हो जाएगा। चमड़ा, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा। यह उद्योग कम मार्जिन पर चलता है। टैरिफ का बोझ सहना संभव नहीं होगा। फैक्ट्रियां बंद होने की स्थिति हो सकेंगी। भारत को भी संभावित प्रतिक्रिया देना चाहिए। - आलोक श्रीवास्तव, संयोजक, फियो।

पिछले साल अगस्त से 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगने के बाद भी शहर से 40 प्रतिशत तक सैडलरी उत्पाद अमेरिका भेजे जा रहे थे। 500 प्रतिशत टैरिफ किसी उद्योग को खत्म कर देगा। यह टैरिफ नहीं बल्कि एक प्रकार का बड़ा राजनीतिक फैसला होगा। इसका प्रभाव यहां तो दिखेगा अमेरिका पर भी पड़ेगा। अगले दो से तीन महीनों में महंगाई चरम पर होगी।
असद इराकी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, चर्म निर्यात परिषद।



अमेरिकी टैरिफ का गहरा असर पहले से ही है। इतना टैरिफ अमेरिका में निर्यात के रास्ते पूर तरह से बंद कर देगा। उन कारोबारियों को सीधे नुकसान होगा जो अभी केवल अमेरिका के साथ कारोबार कर रहे हें। सरकार नए-नए देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर रही है। लेकिन इसका लाभ मिलने में समय लगेगा। ये चमड़ा उद्योग के लिए मुश्किल वक्त होगा।
यादवेंद्र सचान, चमड़ा उत्पाद निर्यातक।


500 प्रतिशत टैरिफ से निर्यातकों के सामने बहुत बड़ी चुनौती आ जाएगी। सरकार को भी अमेरिकी ओरिजन उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाना चाहिए। यहां का सप्लाई चेन प्रभावित होगी तो अमेरिका की भी होगी। अमेरिकी के बाजारों पर कानपुर समेत पूरे देश के अलावा चीन के उत्पादों का 78 प्रतिशत कब्जा है। भारत और चीन दोनों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगने की बात सामने आ रही है। - जफर-फिरोज, आयात-निर्यात विशेषज्ञ।
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अगस्त में टैरिफ लगने के बावजूद सीमित संख्या में कानपुर से दरी, कुशन कवर, सैडलरी कवर आदि अमेरिका को निर्यात हो रहा था। यदि 500 प्रतिशत टैरिफ लगा तो बहुत समस्या होगी। अचानक से इन उत्पादों की मांग यूरोप से आने लगी है। जर्मनी में उत्पादों का मेला भी लगने जा रहा है। हालांकि, अमेरिका सबसे बड़ा बाजार है। -मोहम्मद इरफान, हथकरघा उत्पाद निर्यातक।
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