कानपुर। ज्वाइंट कमिश्नर एके सिंह पर हुए हमले का सुराग उन्हीं के द्वारा खोली गईं उन दस फाइलों में मिलने की पूरी उम्मीद है, जिस पर उन्होंने खासी मशक्कत करके भारी टैक्स चोरी पकड़ी है। इनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम, इंपोर्ट लाइसेंस पर टैक्सदेयता के अलावा वो पुरानी फाइलें शामिल हैं, जिनमें सेटिंग के चलते भारी राशि का टैक्स मार दिया गया। सोमवार को दफ्तर खुलने के बाद पुलिसिया पड़ताल की दिशा इसी ओर होना तय है।
विभाग में एके सिंह ज्वाइंट कमिश्नर (कार्यपालक) ए-रेंज में तैनात हैं। उनके कार्यक्षेत्र में खंड एक से छह के अलावा उन्नाव जिला है। इसमें गोविंदनगर, फजलगंज, दर्शनपुरवा, पनकी और दादा नगर इंडस्ट्रियल एरिया आता है। इन क्षेत्रों में कई प्रमुख और बड़े व्यापारियों का विभाग से वास्ता पड़ता है। सूत्रों के मुताबिक एके सिंह विभाग में जानकार और होशियार अधिकारियों में शुमार हैं, जिन्हें टैक्स से संबंधित गहन जानकारी है। हाल ही में उन्होंने कुछ ऐसी फाइलों की छानबीन शुरू की है, जिसमें आईटीसी क्लेम के अलावा इंपोर्ट लाइसेंस की टैक्स देयता में फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें कुछ गुटखा व्यवसायियों के अलावा लोहे और सुपाड़ी के कारोबार से जुड़ी फर्मों के नाम हैं। वहीं लगभग पांच साल पुराने के कुछ ऐसे मामले भी एके सिंह की पकड़ में आए हैं, जिसमें विभागीय सेटिंग से करोड़ों की टैक्स अदायदी की ही नहीं गई। इसके अतिरिक्त करोड़ों की टैक्स देयता से जुड़े ऐसे मामलों पर वे हाईकोर्ट में अपील दायर करवाने की तैयारी में थे, जो ट्रिब्युनल से निपट चुके हैं। इस तरह की दस फाइलों के खुलने से शहर के कई बड़े नाम करोड़ों के झटके में आ सकते हैं। इसकी जानकारी एके सिंह ने अपने घर आए वाणिज्य कर कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण को भी दी है।
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कौन है एसआईबी का पांचवा जेसी?
कानपुर। वाणिज्य कर विभाग का एक अधिकारी खुद को एसआईबी का पांचवा ज्वाइंट कमिश्नर बताकर शहर के तमाम बड़े व्यापारियों और उद्यमियों को फोन करता है, जबकि एसआईबी में केवल चार ज्वाइंट कमिश्नर ही तैनात हैं। न केवल व्यापारियों बल्कि स्टेशन पर काम करने वाले दलालों और ट्रांसपोर्टरों को भी यह अफसर अपने को एसआईबी का अधिकारी बताकर वसूली साझा करने की धमकी देता है। तमाम बड़े व्यापारियों को उसकेे घर आते-जाते भी देखा गया है।
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कार्यक्षेत्र में दखल का भी मामला
कानपुर। अच्छी जानकारी के चलते एके सिंह को विभाग के आला अधिकारियों अन्य खंडों की फाइलें भी जांचने-परखने के लिए देते थे। इससे भी तमाम अधिकारी उनसे ईर्ष्या रखते थे। इसके अलावा अपने कार्यक्षेत्र में आने वाले व्यापारियों के कर निर्धारण की फाइलों को विशिष्ट अधिकार (10-बी/धारा-56) का इस्तेमाल करके दोबारा कर निर्धारण करवाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि खंड में तैनात असिस्टेंट और डिप्टी कमिश्नर को ‘समझने’ के बाद फाइल दोबारा खुलती है तो व्यापारी भी चिढ़ जाता है।