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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष-सचिव पर एफआईआर

Sun, 09 Nov 2014 05:30 AM IST
Kanpur
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कानपुर। आईएमए के लेटर पेड पर एक महिला डॉक्टर के मनोरोगी होने की आशंका जताते हुए जांच की संस्तुति करने पर उसी महिला डॉक्टर ने आईएमए की तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव, अपनी रिश्तेदार ईएसआई की डॉक्टर और विपक्षी वकील के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। महिला डॉक्टर का कहना है कि ‘मैं मनोरोगी नहीं हूं और ये सब आरोपी लोग मुझे जबरदस्ती मनोरोगी साबित करके ससुराल में मेरे हिस्से की प्रापर्टी हड़पने की साजिश में शामिल हैं। मेरा ससुराल वालों से मुकदमा चल रहा है और आरोपी लोग ससुराल वालों से मिलकर मेरे खिलाफ षड़यंत्र रच रहे हैं। उधर स्वरूपनगर थाना प्रभारी ने बताया कि रिपोर्ट कई धाराओं में दर्ज की गई है। मामले की जांच एसएसआई रामप्रकाश को सौंपी गई है।
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स्वरूप नगर निवासी डॉ. नीना मोहन रायजादा जेके कैंसर हॉस्पिटल में एनेस्थिसिया एक्सपर्ट थीं। तीन दिन पहले ही उन्होंने सैंफई मेडिकल कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाइन किया है। उनकी शादी हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष मोहन से हुई है। डॉ. नीना ने बताया कि उनका अपने ससुराल के लोगों से विवाद चल रहा है। वह ससुराल वालों और ससुराल वाले उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा चुके हैं। डॉ. नीना के मुताबिक ससुराल पक्ष के लोगों ने वर्ष 2007 में हैलट ओपीडी से उनके नाम का एक पर्चा बनवाया था। यह पर्चा उन्हें मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक विभाग के हेड रहे डॉ. एसएस अग्निहोत्री को दिखाने के नाम पर बनवाया गया था। अस्पताल के दस्तावेज में पर्चे का बाकायदा रजिस्ट्रेशन भी कराया गया। जबकि उन्होंने खुद को कभी डॉ. अग्निहोत्री या उनकी यूनिट के डॉक्टरों को दिखाया ही नहीं। मेरे नाम ये यह फर्जी पर्चा बनवाया गया था। मैं कभी मनोरोगी थी ही नहीं। इधर उनका और ससुराल वालों के बीच विवाद और बढ़ गया। डॉ. नीना का आरोप है कि करीब दो साल पहले ससुराल पक्ष की ओर से अजय सिंह भदौरिया वकील हो गए। उनकी ससुराल के लोगों से करीबियां बढ़ गईं। उनकी ननद डॉ. ज्योत्सना मोहन, अधिवक्ता अजय सिंह भदौरिया और डॉ. आरती लाल चंदानी ने ससुराल की करोड़ों की प्रापर्टी से उन्हें बेदखल करने और सस्ते दाम पर प्रापर्टी पाने के लिए साजिश रची। 9 जुलाई 2014 को तत्कालीन आईएमए अध्यक्ष डॉ. आरती लाल चंदानी ने आईएमए के लेटर पेड पर उनके मनोरोगी (पैरान्वाइड सीजोफ्रेनिया) होने की आशंका जताते हुए सार्टिफिकेट जारी कर दिया। इस साजिश में उस समय आईएमए के सचिव रहे मनोरोग चिकित्सक डॉ. रवि कुमार को भी शामिल किया गया। सार्टिफिकेट में डॉ. रवि कुमार के भी हस्ताक्षर हैं। डॉ. चंदानी और डॉ. रवि कुमार ने सार्टिफिकेट में उनकी मानसिक रोग संबंधी जांच कराए जाने की संस्तुति भी की। इस सार्टिफिकेट की कॉपी डीएम, एसएसपी, सीएमओ समेत पांच अफसरों को दी गई। एसएसपी के. सुनील इमैनुएल ने इस सार्टिफिकेट के आधार पर सीएमओ को पत्र लिखकर उनकी किसी नामी मनोचिकित्सक से जांच कराए जाने की संस्तुति कर दी।
डॉ. नीना का कहना है कि हैलट ओपीडी का जो पर्चा बना है, वह फर्जी है। पर्चे पर मेडिकल कॉलेज या हैलट का लोगो नहीं है। प्रिंटिंग भी ठीक नहीं है। कोई अक्षर छोटे हैं और कोई बड़े। डॉ. अग्निहोत्री के इस फर्जी पर्चे को आधार बनाकर आईएमए की पूर्व अध्यक्ष एवं सचिव ने आईएमए के लेटर पेड पर उनके मानसिक रोगी की आशंका जता दी। इस सार्टिफिकेट का घरेलू हिंसा और अन्य एक मामले में कोर्ट में प्रयोग किया गया। इससे उनकी बदनामी हुई और मुकदमे में पक्ष कमजोर हुआ। डॉ. नीना का कहना है कि वह इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आईजी आशुतोष पांडेय, वर्तमान एवं पूर्व डीआईजी, एसएसपी के. सुनील इमैनुएल और प्रमुख सचिव से कई बार मिली। तब कहीं उनकी एफआईआर दर्ज हुई।
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डॉ. नीना मोहन रायजादा की तहरीर पर मेडिकल कॉलेज मेडिसन विभाग की हेड एवं आईएमए की पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरती लाल चंदानी, आईएमए सचिव रहे मनोचिकित्सक डॉ. रवि कुमार, ईएसआई की डॉ. ज्योत्सना मोहन और अधिवक्ता अजय सिंह भदौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467,468, 499, 500 और 120 बी लगी है। मामले की जांच की जा रही है।
राजीव कुमार द्विवेदी, थानाप्रभारी स्वरूप नगर


डॉ. नीना के मामले में हमारा कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं है। उससे आमने - सामने बात भी नहीं हुई। डॉ. एसएस अग्निहोत्री द्वारा डॉ. नीना के ट्रीटमेंट का प्रिस्क्रप्शन अटैच है। इसमें उसकी बीमारी पैरा स्रीजोफीनिया लिखी है। उसी आधार पर सीएमओ को पैनल बैठाकर इसकी जांच के लिए एक कांफीडेंशियल लेटर लिखा गया था, जिसे डॉ. नीना ने जाहिर कर दिया। मैंने सिर्फ उसकी जांच की संस्तुति की है। लेटरपेड पर मेरे और डॉ. रवि के हस्ताक्षर हैं। डीजीपी द्वारा इस मामले की जांच कराई गई। सब इंस्पेक्टर डॉ. विजय लक्ष्मी आदि ने आकर जांच की। जांच रिपोर्ट में मेरी गलती नहीं साबित हुई थी।
डॉ. आरती लाल चंदानी, पूर्व अध्यक्ष, आईएमए

मुझे डॉ. नीना के मामले में एफआईआर की जानकारी नहीं है। आईएमए के मेरे कार्यकाल के दौरान आईएमए के लेटरपैड पर डॉ. नीना के पति डॉ. मनीष और नंद डॉ. ज्योत्सना की कंपलेंट आई थी। उसमें कहा गया था कि डॉ. नीना उन्हें परेशान कर रही हैं। हेल्प की जरूरत है। इनका इलाज कराएं। उसमें मेडिकल कालेज के मनोरोग विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एसएस अग्निहोत्री का लेटरपैड लगा था। तय हुआ कि इस मामले में फैसला लेने से पहले मनोरोग विशेषज्ञ से सलाह ले ली जाए। आईएमए के लेटरपैड पर डीएम, एसएसपी समेत पांच अफसरों को पत्र लिखा गया। पत्र में डॉ. आरती और मेरे हस्ताक्षर हैं। मैं नहीं बता सकता कि डॉ. नीना मनोरोगी हैं या नहीं।
डॉ. रवि कुमार, पूर्व सचिव, आईएमए


डॉ. नीना मोहन रायजादा एब्नार्मल लेडी हैं। साइक्रेट्रिक पेशेंट हैं। मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के पूर्व हेड डॉ. एसएस अग्निहोत्री ने 2007 में उनका इलाज किया है। प्रिसक्रप्शन में उनकी हरकतें, दवाएं और ट्रीटमेंट लिखा है। मेंटल पेशेंट ठीक से दवाएं न ले या बीच में इलाज छोड़ दे तो बीमारी उभर सकती है। नीना ने पूरा ट्रीटमेंट नहीं लिया। उनकी फैमली हिस्ट्री भी है।
डॉ. ज्योत्सना मोहन, स्त्री रोग विशेषज्ञ (डॉ. नीना का नंद)

सार्टिफिकेट के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह मामला डॉक्टरों के बीच का है। रही मेरे खिलाफ भी रिपोर्ट लिखाने की बात तो मैं डॉ. नीना रायजादा की ननद डॉ. ज्योत्सना और उनके माता-पिता का वकील हूं। डॉ. नीना रायजादा का झगड़ा अपने ससुरालियों से चलता रहता है इसलिए मुझे भी अभियुक्त बना दिया होगा।
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-अजय भदौरिया, अधिवक्ता


किस धारा में कितनी सजा
420-षड़यंत्र-सात साल कैद और जुर्माना
467-कूटरचना कर दस्तावेज बनाना-दस साल से उम्र कैद तक
468-छल करने के लिए दस्तावेज तैयार करना-सात साल कैद
499-इस धारा में मानहानि को परिभाषित कर सजा का प्राविधान किया गया है
500-मानहानि करना-दो साल कैद
120 बी-आपराधिक षडयंत्र-मूल अपराध में तय सजा के बराबर सजा
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