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23 को पितृविसर्जन, 24 को स्नानदान अमावस्या

Mon, 22 Sep 2014 05:31 AM IST
Kanpur
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कानपुर। पितृ विसर्जन 23 सितंबर को होगा। पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन होता है और अमावस्या मध्यान्ह काल में ही होनी चाहिए। इस हिसाब से इस बार पितृ विसर्जन 23 सितंबर को ही होगा। पंचांगों की भिन्नता के कारण कुछ लोगों ने विसर्जन 24 सितंबर को माना है जो गलत है। 23 सितंबर को चतुर्दशी प्रात: 9 बजकर 46 मिनट तक है और इसके बाद अमावस्या लग रही है। पंडित के.ए. दुबे पद्मेश ने यह जानकारी देते हुए बताया कि 23 सितंबर दिन मंगलवार को श्राद्ध की अमावस्या महालया अर्थात पितृ विसर्जन अमावस्या का पर्व है, लेकिन 24 सितंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या है। जिस कारण से स्नान एवं दान की अमावस्या 24 सितंबर को ही रहेगी। कलश की स्थापना अमावस्या में हो नहीं सकती। प्रात: 11 बजकर 45 मिनट तक अमावस्या है, इसके बाद प्रतिपदा है। उन्होंने बताया कि आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 25 सितंबर गुरूवार को है। शारदीय नवरात्र और कलश की स्थापना उसी दिन होगी। उस दिन अद्भुत संयोग है कि शुक्र अपनी नीच राशि कन्या में प्रवेश करेगा। सूर्य, चंद्र, शुक्र राहु की युति होगी। यह अद्भुत युति से जिनके दांपत्य जीवन कष्टमय हैं या जिनके विवाह नहीं हो पा रहे हैं उनके लिए लाभदायी रहेगी। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति पितृ पक्ष के पंद्रह दिनों तक श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं करते हैं, वे अमावस्या को ही अपने पितरों के निमित्त श्राद्धादि संपन्न करते हैं। जिन पितरों की तिथि याद नहीं हो, उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण आदि इसी अमावस्या को किया जाता है। इस दिन सभी पितरों को विसर्जन होता है। अमावस्या के दिन पितर अपने पुत्रादि के द्वार पर पिंडदान एवं श्राद्धादि की आशा में जाते हैं, यदि वहां उन्हें पिंडदान या तिलांजलि आदि नहीं मिलती है तो वे शाप देकर चले जाते हैं। अतएव एकदम श्राद्ध का परित्याग न करें, पितरों को संतुष्ट अवश्य करें।
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