कानपुर। अब जी-लेबोरेट्रीज कंपनी से आर्टीसुनेट इंजेक्शन की खरीदारी नहीं की जाएगी। जीएसवीएम मेडिकल कालेज प्रशासन ने इस कंपनी से एंटीबायोटिक्स समेत चार दवाओं की आपूर्ति रोक दी है। ये दवाएं अब दूसरी कंपनियों से मंगाई जा रही हैं।
मेडिकल कालेज से संबद्ध हैलट समेत अन्य अस्पतालों में करीब 550 दवाएं खरीदी जाती हैं। इस साल इनमें से 300 से ज्यादा दवाओं की आपूर्ति हिमाचल प्रदेश की दवा कंपनी जी- लेबोरेट्रीज कर रही है। इसी कंपनी से पिछले साल खरीदे गए एंटी मलेरिया इंजेक्शन आर्टीसुनेट जांच में घटिया निकले थे। हालांकि इन इंजेक्शनों का उपयोग रोकने के अलावा संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है, पर कालेज प्रशासन ने इस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इस साल इसी कंपनी के एंटीबायोटिक्स इंजेक्शन सिफेक्जॉन, इंजेक्शन एमाइकासिन, इंजेक्शन पेंटाप्राजॉल और सिप्लॉक्स टेबलेट की खरीदारी रोक दी है। इस कंपनी को इन दवाओं के लिए दिए गए आर्डर निरस्त कर दिए गए हैं। मेडिकल कालेज पर्चेज कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि अब सिफेक्जॉन इंजेक्शन और पेंटाप्राजॉल इंजेक्शन यूनीमार्क दवा कंपनी, एमाइकासिन इंजेक्शन नियोन कंपनी और सिप्लॉक्स इंटास कंपनी से खरीदे जाएंगे। इसके लिए इन कंपनियों के रेट कांट्रेक्ट (आरसी) को स्वीकृति भी दे दी गई है। मेडिकल कालेज के वित्त नियंत्रक श्रीधर शुक्ला के अनुसार अब जी-लेबोरेट्रीज से आर्टीसुनेट इंजेक्शन नहीं खरीदा जाएगा। पर्चेज कमेटी की आगामी बैठक में इस पर विचार - विमर्श होगा।