कानपुर। वर्षों से बिजली, पानी और सड़क की समस्या का दंश झेल रहे साउथ सिटी के अंबेडकर नगर और रविदासपुरम में विकास की उम्मीदें अब हिलोर मार रही हैं। उनका मानना है कि अब ज्यादा दिन उन्हें यह सब नहीं सहना पड़ेगा। न केवल नालियां और सड़क बनेंगी बल्कि सफाई भी कायदे से होगी। कुछ को तो लाइट की जबरदस्त कटौती से भी निजात मिलने की उम्मीद दिख रही है।
शहर के वार्ड-74 में आने वाली अम्बेडकरनगर और रविदासपुरम उन 32 कॉलोनियों में हैं जिन्हें शुक्रवार को केडीए ने नगर निगम को हैंडओवर किया है। अंबेडकर नगर में वर्ष 1995-96 में बसावट शुरू हुई थी। वहीं रविदासपुरम में वर्ष 2000 के लगभग आबाद होना शुरू हुआ था। इतने सालों के बाद भी लोग टूटी सड़कों, सीवर, खराब हैंडपंपों और सफाई की समस्या से परेशान थे। शनिवार शाम यहां घरों के बाहर बैठे लोगों में होने वाले विकास कार्यों को लेकर चर्चा होती रही। कुछ बोले, बहुत इंतजार किया, अब अच्छे दिन आए हैं। तो कुछ ने कहा कि कॉलोनी हैंडओवर भले ही हो गई हों, अफसर विकास कब कराएंगे, इसे लेकर अभी से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
----अंबेडकर नगर कॉलोनी----
करीब 1000 मकान, 5000 आबादी
प्रमुख समस्या: टूटी सड़के, नालियां गुम, ग्रीन बेल्ट गायब। चार-पांच गलियों की आबादी के लिए सिर्फ एक हैंडपंप है। न सफाईकर्मी आते हैं, न कूड़ा उठता है। रोड लाइटें ठूंठ खड़ी हैं। बाइपास से करीब दो फुट नीचे बसी आबादी के लिए बारिश का मौसम बहुत सताता है। सभी मोहल्लों में टापू सा नजारा दिखता है।
खास बात: नगर निगम बराबर हाउस टैक्स ले रहा है।
विकास के लिए मिला बजट- लगभग 4 करोड़ 25 लाख रुपए।
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-------रविदासपुरम कॉलोनी-----
लगभग 216 मकान, आबादी- 1200
प्रमुख समस्या- सीवर और नाला ओवरफ्लो रहता है। बरसात में यहां आना-जाना बेहद मुश्किल। पूरा इलाका बाढ़ जैसे हालातों में फंस जाता है। सफाईकर्मी कभी झांकने तक नहीं आते। सड़कें गायब हैं। मिट्टी- कूड़े के ढेर लगे हैं।
विकास के लिए मिला बजट: 32 लाख रुपए।
-----पब्लिक बोली-------------
मेरी तो बस एक इच्छा है यहां की सड़क बन जाए। हालत ऐसी है कि आए दिन लोग गिरकर चुटहिल होते हैं।
-श्रीनारायण पांडे, अम्बेडकर नगर
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पूरे क्षेत्र में सिर्फ एक हैंडपंप है। उस पर भी भारी भीड़ रहती है। रोज झगड़ा होता है। हम लोग तो सोचने लगे थे कि कभी यहां के अच्छे दिन आएंगे भी कि नहीं।
-प्रदीप शर्मा, अंबेडकर नगर
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शाम होते ही यहां स्ट्रीट लाइटें न होने से भयंकर अंधेरा हो जाता है। न जाने कितने बार गुहार लगाने के बावजूद अफसरों ने नहीं सुनी।
-सुनील गुप्ता, अंबेडकर नगर
मोहल्ले की दशा ऐसी है कि रहने का मन नहीं करता। बहुत लाइट जाती है यहां। ग्रीन बेल्ट पूरी तरह गायब है।
-सीमा सिंह, अंबेडकर नगर
यहां सीवर की भयंकर समस्या है। नालियां हैं नहीं। ड्रेनेज सिस्टम फेल है। नाला उफनाकर घरों केबाहर बहता है।
-अंजू चौहान, रविदासपुरम
घरों के बाहर बने नालों के चेंबर अक्सर ओवरफ्लो हो जाते हैं। कोई सफाईकर्मी यहां नहीं आता है। अब सुना है यहां के अच्छे दिन आ गए हैं।
-सुधा शर्मा, रविदासपुरम
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दोनों कॉलोनियों को हैंडओवर करने के लिए बहुत संघर्ष किया। फिर भी अफसरों ने विकास कार्य न कराए तो बहुत तकलीफ होगी। पैसा मिला है तो काम भी होगा।
-मनीष शर्मा, पार्षद
सोमवार या मंगलवार से इन कॉलोनियों के टेंडर पड़ने का काम शुरू हो जाएगा। टेंडर का काम पूरा होते ही विकास संबंधी कार्य शुरू हो जाएंगे। उम्मीद है बारिश के सीजन में यहां काम चालू होंगे।
तरुण शर्मा, चीफ इंजीनियर, नगर निगम