कानपुर। शहर के नो टेंपो जोन रूटों पर दौड़ती बसें सालभर में ही खटारा हो गईं। हालात ऐसी है कि रोडवेज ने दो सौ बसों के परमिट आरटीओ दफ्तर में सरेंडर कर दिए। रविवार को सिर्फ 12 बसें ही फजलगंज डिपो से निकलीं। ज्यादातर बसें टायर न होने से नहीं चल पा रही हैं। आरएम राजू चौहान ने कहा कि बस मेंटेनेंस के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बोर्ड की बैठक में भी इस पर चर्चा होगी। धन आते ही बसें दुरुस्त कराई जाएंगी।
रखरखाव न होने से खराब बसें फजलगंज डिपो में खड़ी हैं। बसें खड़ी होने के बाद भी आरटीओ में परमिट सरेंडर न करने से टैक्स लगता है इसलिए रोडवेज अधिकारियों ने शनिवार को दो सौ बसों के परमिट आरटीओ में सरेंडर कर दिए। संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि रविवार को सिर्फ 12 बसें ही रोड पर निकलीं। उसमें भी छह बसें टायर फटने से खड़ी हो गईं। अब फजलगंज डिपो पर बंदी का खतरा मंडरा रहा है। संविदा कर्मचारियों ने कानपुर से सांसद मुरली मनोहर जोशी से भी मदद की गुहार लगाई है।
पंद्रह रूटों पर चलाई जा रही थीं
शहर में घंटाघर, भौती, रावतपुर, जाजमऊ, बड़ा चौराहा, मूसानगर, जरौली, माती, सजारी, नौगवां, गहनौ, रूरा, इंदिरानगर, यशोदानगर के लिए विभिन्न पंद्रह रूटों पर बसें चलाई जा रही थीं। अब तो तमाम रूटों पर बसें बंद ही हो चुकी हैं।