कानपुर। मैनेजमेंट विवाद में 400 से ज्यादा स्टूडेंट्स की पढ़ाई चौपट होने और भविष्य दांव पर लगने का हवाला देते हुए भाभा इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (बीआईएसटी) को बंद करने की सिफारिश गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) से की गई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर जीबीटीयू कुलपति द्वारा गठित पांच सदस्यीय कमेटी ने जांच के बाद कहा है कि बीआईएसटी के स्टूडेंट्स को दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में शिफ्ट कर दिया जाए, तभी पठन-पाठन सही ढंग से चल सकेगा। अभी पढ़ाई लगभग ठप है। इसकी पुष्टि जीबीटीयू के रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने भी की है। कहा है कि स्टूडेंट्स को शिफ्ट करने की सिफारिश हुई है। इस मसले पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
बीआईएसटी में मैनेजमेंट विवाद है। इसको लेकर ही कोषाध्यक्ष रहीं सुनीता सचान ने यहां के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पढ़ाई बाघपुर स्थित एक डिग्री कॉलेज में शुरू करा दी, जो नियमानुसार गलत है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के मानक के हिसाब से बीटेक की पढ़ाई डिग्री कॉलेज में नहीं कराई जा सकती है। बाद में सुनीता सचान ने बीआईएसटी कैंपस में पठन-पाठन के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसपर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मामला जीबीटीयू के कुलपति प्रो. आरके खांडल को सौंपा। कुलपति ने प्रो. वीके सिंह, प्रो. ओंकार सिंह, प्रो. बीएन मिश्रा, प्रो. अमरीक सिंह, प्रो. जगदीश सिंह की अगुवाई में जांच कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी ने 21, 22 सितंबर को कैंपस में जाकर जांच-पड़ताल की। कमेटी ने पाया कि इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स की पढ़ाई डिग्री कॉलेज में कराई जा रही है। कमेटी ने नोटिस जारी करके सुनीता सचान से बीआईएसटी से जुड़े दस्तावेज तलब किए, जो नहीं दिए गए। प्रो. वीके सिंह ने बताया कि दस्तावेज न मिल पाने के कारण ही बीआईएसटी के स्टूडेंट्स को दूसरे इंजीनियरिंग कॉलेज में शिफ्ट करने की सिफारिश की गई है। ऐसा होने पर संस्थान अपने आप बंद हो जाएगा। मामले में सुनीता सचान से बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका।