कानपुर। फिलहाल सिर्फ एलपीजी (रसोई गैस) कनेक्शनधारकों के ही आधार कार्ड बनाए जाएंगे। इसके लिए सप्ताह भर के अंदर गैस एजेंसियों में कैंप लगेंगे। गैस एजेंसी संचालक कनेक्शन संख्या के आधार पर उपभोक्ताओं को बांटकर अलग-अलग तिथि में आधार कार्ड बनवाने का कार्यक्रम घोषित करेंगे।
सोमवार को भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय केसंयुक्त सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी समीर वर्मा, एडीएम आपूर्ति आरएन वाजपेयी, बैंक अफसरों और पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर इस बारे में रूपरेखा बनाई। संयुक्त सचिव ने कहा कि एक जनवरी 2014 से सीधे खाते में सब्सिडी ट्रांसफर होगी। प्रदेश में पायलट प्रोजेक्ट के तहत कानपुर, इटावा और लखनऊ में इसके लिए उपभोक्ताओं को आधार कार्ड बनवाना होगा। अभी सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर 427 रुपये का मिल रहा है। बगैर सब्सिडी वाला सिलेंडर 970.50 रुपये का है। इस तरह उपभोक्ता को सिलेंडर लेते समय पूरे 970.50 रुपये देने होंगे। उनकी सब्सिडी 543.50 रुपये उनके बैंक खाते में केंद्र सरकार की तरफ से जमा कराई जाएगी। सिलेंडर बुक कराते ही उपभोक्ता के खाते में सब्सिडी 543.50 रुपये पहुंच जाएगे। सिलेंडर लेने से पहले वह यह राशि निकालेगा और बाकी के 427 रुपये अपनी तरफ से मिलाकर भुगतान करेगा। एक वित्तीय वर्ष में उपभोक्ता को सब्सिडी वाले नौ सिलेंडर दिए जाते हैं।
अगर कार्ड है तो
जिनके पास पहले से ही आधार कार्ड है वे फार्म भरते हुए आधार कार्ड रजिस्टर कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। वह अपनी गैस एजेंसी से फार्म लेकर अपनी औपचारिकता पूरी करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हां, एक ध्यान देने वाली बात। अगर आपने 31 मार्च 2012 से पहले आधार कार्ड बनवाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था और अभी तक कार्ड नहीं मिला है तो दुबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
‘बिना होम डिलेवरी 15 रुपये लिए तो भुगतेंगे’
संयुक्त सचिव ने ली सेल्स अफसरों की क्लास
ट्रक खड़ा कर कहीं भी नहीं बांट सकेंगे सिलेंडर
सेल्स अफसरों को बनाना होगा शहर में दफ्तर
डिलेवरी के समय तौल व लीकेज चेकिंग जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
कानपुर। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय केसंयुक्त सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कहा कि बिना होम डिलेवरी के उपभोक्ताओं से 15 रुपये वसूलना गलत है। अगर ऐसा हुआ तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। कहीं भी शहर में ट्रक खड़े कर सिलेंडर नहीं बांटे जा सकते हैं। अगर इस पर रोक न लगे तो जिलाधिकारी और एडीएम आपूर्ति अपनी रिपोर्ट बनाकर भेज दें। तुरंत कड़ी कार्रवाई होगी।
कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए संयुक्त सचिव ने कहा कि एजेंसी संचालक मनमाने ढंग से प्वाइंट बनाकर रसोई गैस नहीं बांट सकते हैं। उपभोक्ता प्वाइंट पर सिलेंडर लेने आएं और उससे होम डिलेवरी के 15 रुपये लिए जाएं, यह सरासर अवैधानिक है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि उपभोक्ता को सिलेंडर तौल कर दिया जाए, इसलिए वेंडर तराजू लेकर जरूर चलें। लीकेज सिलेंडर की जांच भी उपभोक्ता कर सकता है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों के सेल्स अफसरों को शहर में दफ्तर बनाना होगा। शिकायतें हैं कि ज्यादातर लखनऊ में निवास बनाए हैं। उपभोक्ताओं के फोन नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में एडीएम आपूर्ति से एक सप्ताह में फीड बैक लेंगे। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कंपनी से सेल्स अफसरों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी।