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‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने दिलाया ब्लड

Thu, 04 Jul 2013 05:30 AM IST
Kanpur
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कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन की प्रेरणा से शहर के दो महादानियों ने बुधवार को एक ऐसी गरीब महिला के पति को ब्लड देकर जान बचा पाई जो हर ओर से नाउम्मीद हो चुकी थी। पैसे थे नहीं, गंभीर रूप से बीमार पति के लिए कोई एक यूनिट तो छोड़िए, कोई दो बूंद खून देने को तैयार नहीं था। हैलट अस्पताल प्रशासन के जिस भी जिम्मेदार से मिली, उसने उसे किसी भी तरह की मदद से दो टूक मना कर दिया था।
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कच्ची मडै़या, लक्ष्मणपुरवा, जूही निवासी टेंपो चालक राजेश (35) को 2 जुलाई को पेट में असहनीय दर्द होने के कारण हैलट इमरजेंसी में डॉ. अनिल वर्मा की यूनिट में भर्ती कर लिया। पत्नी आशा के अनुसार उसके पास साढ़े छह सौ रुपये थे, जो दवाओं में खर्च हो गए। रात में ही पति को एनओटी वार्ड के बेड - नौ में शिफ्ट कर दिया गया। बुधवार को सुबह डॉक्टर ने बताया कि आंतों में इन्फेक्शन है। एक यूनिट ब्लड तुरंत चाहिए और भी जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टरों ने राजेश का ब्लड सैंपल निकालने के साथ ही मेडिकल कालेज ब्लड बैंक से ब्लड लाने के लिए फार्म भी भरकर दे दिया। उसने पैसे और रक्तदान करने के लिए कोई न होने की बात कही तो जूनियर डॉक्टरों ने अफसरों से फ्री ब्लड का आदेश कराकर लाने को कहा। बकौल आशा वह अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसबी मिश्रा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक के दफ्तर कई बार गई। इमरजेंसी मेडिकल अफसर डॉ. विनय कुमार से भी बीपीएल कार्ड होने का हवाला देकर गुहार लगाई, पर किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी।
दोपहर बाद वह नाउम्मीद होकर हैलट इमरजेंसी में रोने लगी। स्वैच्छिक रक्तदान कराने गए ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ प्रतिनिधि ने उसे देखा और फाउंडेशन की स्वैच्छिक रक्तदाता सूची में हाल ही दर्ज हुए स्वैच्छिक रक्तदाता गोकुल नगरी (कृष्णा नगर) निवासी ऋषभ मिश्रा से फोन पर संपर्क करके रक्तदान का आग्रह किया। यह सुन वह और उनके दोस्त 25 मिनट में ही मेडिकल कालेज ब्लड बैंक पहुंच गए। एचडीएफसी कर्मी ऋषभ और उनके स्वैच्छिक रक्तदाता दोस्त धनकुट्टी के शिवेंद्र भी मेडिकल कालेज ब्लड बैंक आए और रक्तदान किया। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ ने दोनों को प्रशस्तिपत्र दिए।
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