कानपुर। प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में एडमिशन के लिए पीएचडी का नया अध्यादेश (कॉमन आर्डिनेंस) जारी कर दिया गया है। यह अध्यादेश प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों पर लागू होगा। शासन ने अध्यादेश की कॉपी 14 जून को सभी विश्वविद्यालय के कुलपतियों को भेज दी है। उच्च शिक्षा विभाग की विशेष सचिव अनीता मिश्रा ने कहा है कि अध्यादेश को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) की नियमावली को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसलिए कुलपति नए अध्यादेश को अपनी एक्जीक्यूटिव काउंसिल से पास कराकर शासन को भेज दें, ताकि कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) कराकर पीएचडी की एडमिशन प्रक्रिया पूरी की जा सके। इस बदलाव से पीएचडी में रजिस्ट्रेशन, एडमिशन की सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। अब एक्जीक्यूटिव काउंसिल से अनुमोदन लेकर संबंधित विश्वविद्यालय पीएचडी की एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
पीएचडी का रजिस्ट्रेशन, एडमिशन प्रक्रिया पिछले पांच साल से ठप है। 2011 में पीएचडी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराई गई लेकिन नया अध्यादेश लागू न होने के कारण एडमिशन प्रक्रिया लटकी रह गई। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी ने अपना अध्यादेश बनाया। पीएचडी के एडमिशन को लेकर आवेदन भी मांगे लेकिन अध्यादेश का अनुमोदन राजभवन से नहीं हो सका। इसलिए सात हजार अभ्यर्थियों के एडमिशन पर विचार नहीं किया जा सका। अब नया अध्यादेश आ गया है। इससे एडमिशन की राह आसान हो जाएगी। उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ के महामंत्री डॉ. विवेक द्विवेदी और कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. बीडी पांडेय ने बताया कि नए अध्यादेश के मुताबिक पीएचडी की सभी सीटें सीईटी से भरी जाएंगी। सीईटी के बाद हर विश्वविद्यालय सब्जेक्टवार सीटों का ब्योरा जारी करेगा। विज्ञापन निकालकर एडमिशन का विकल्प देगा। अपनी रैंक के हिसाब से आवेदन करके अभ्यर्थी एडमिशन लेंगे।
छह महीने का होगा सेमेस्टर कोर्स
पीएचडी का एंट्रेंस टेस्ट पास करने के बाद छह महीने का सेमेस्टर कोर्स करना जरूरी होगा। यह कोर्स 50 फीसदी के साथ पास करना अनिवार्य रहेगा। कोर्स में तीन पेपर (रिसर्च मैथडलॉजी, कंप्यूटर अप्लीकेशन, क्वांटिटेटिव मैथड) की पढ़ाई होगी। हर पेपर को कम से कम 40 फीसदी मार्क्स के साथ पास करना अनिवार्य होगा। इससे कम मार्क्स हुए तो कोर्स की पढ़ाई नए सिरे से करनी पड़ेगी। इसकी पढ़ाई संबंधित विश्वविद्यालय के कैंपस में कराई जाएगी।
छह साल बाद निरस्त होगा रजिस्ट्रेशन
पीएचडी की थीसिस जमा करने की अधिकतम समयसीमा छह साल तय की गई है। इसके बाद पीएचडी का रजिस्ट्रेशन स्वत: निरस्त हो जाएगा। यदि रिसर्च स्कॉलर चाहे तो दो साल में ही थीसिस जमा कर सकता है। थीसिस जमा करने की अधिक से अधिक समयसीमा चार साल निर्धारित है। यदि इस दौरान थीसिस नहीं जमा हो सकी तो रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) से अनुमति लेकर दो साल का एक्सटेंशन और लिया जा सकता है। इसके बाद एक्सटेंशन नहीं मिलेगा।
ऐसे चुन सकेंगे सुपरवाइजर
छह महीने का सेमेस्टर कोर्स पास करने वाले स्कॉलर टॉपिक चुनेंगे, फिर सिनॉप्सिस तैयार करके तीन सुपरवाइजर का नाम सेलेक्ट करेंगे। सिनॉप्सिस, सुपरवाइजर का पैनल रिसर्च डेवलपमेंट कमेटी (आरडीसी) के समक्ष जाएगा। आरडीसी के चेयरमैन वीसी होंगे। डीन, एचओडी और कुलपति की ओर से नामित दो सदस्य भी रहेंगे। आरडीसी से अनुमोदन के बाद संबंधित सुपरवाइजर के अंडर पर संबंधित टॉपिक पर रिसर्च शुरू किया जा सकेगा। सुपरवाइजर की जिम्मेदारी होगी कि वह रिसर्च स्कॉलर के रिसर्च की प्रगति आख्या हर छह महीने में आरडीसी को भेजे।
इनको नहीं देना होगा एंट्रेंस टेस्ट
- आर्मी, एयरफोर्स, नेवी में 15 साल की सेवा पूरी करने वाले जवानों को भी पीएचडी के एंट्रेंस टेस्ट से बाहर रखा गया है। वह चाहें तो सीधे एडमिशन लेकर डिफेंस स्टडीज में रिसर्च कर सकते हैं।
- नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट), काउंसिल फॉर साइंटिफिक इंडस्ट्रीयल रिसर्च (सीएसआईआर) क्वालीफाई करने वाले भी सीधे एडमिशन ले सकेंगे।
- प्रोबेशन पूरा करने वाले रेग्युलर टीचर भी एंट्रेंस टेस्ट से बाहर रखे गए।
- 75 फीसदी या उससे ज्यादा स्कोर के साथ ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) पास करने वाले भी सीधे एडमिशन के हकदार होंगे।
ये होगी फीस
एंट्रेंस टेस्ट पास करने के बाद सामान्य, ओबीसी के अभ्यर्थी को 25 हजार रुपये फीस जमा करनी पड़ेगी। एससी, एसटी की फीस 12500 रुपये है। फीस जमा करने के बाद छह महीने के सेमेस्टर कोर्स की पढ़ाई करनी होगी। कोर्स पास करने के बाद सामान्य, ओबीसी अभ्यर्थी को 10 हजार रुपये फीस और जमा करनी होगी। एससी, एसटी की फीस पांच हजार रुपये होगी। यह फीस मूल्यांकन आदि के लिए ली जाएगी।