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दुनिया से विदा हो गए पं. रामबालक मिश्र

Sun, 09 Jun 2013 05:30 AM IST
Kanpur
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कानपुर। बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के पूर्व चेयरमैन पं. राम बालक मिश्र का शनिवार सुबह मरियमपुर अस्पताल में निधन हो गया। वह 93 साल के थे। बार और बेंच में भीष्म पितामह के नाम से मशहूर रहे पं. राम बालक मिश्र इन दिनों काफी दिन से अस्वस्थ चल रहे थे। उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों अधिवक्ता, शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े लोग और न्यायिक अफसर शामिल हुए।
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उन्होंने जुलाई 1945 में प्लीडर के रूप में वकालत शुरू की थी। 1969-70 में वह लायर्स एसोसिएशन के महामंत्री रहे। 1971 में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। 1974 में बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के सदस्य रहे। 1984 में बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के वाइस चेयरमैन चुने गए। 1987 में बार कौंसिल के चेयरमैन बने। इसके बाद 1992 तक बार कौंसिल के सदस्य रहे। 1999 से अब तक एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन रहे। इसके अलावा करीब डेढ़ दर्जन शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े रहे। उन्होंने कई कालेजों की स्थापना भी की थी। इन दिनों उनका मरियमपुर अस्पताल में इलाज चल रहा था। शनिवार सुबह करीब नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी जानकारी पाकर अधिवक्ता, न्यायिक अफसर, शैक्षिक संस्थाओं से जुड़े लोग उनके काकादेव स्थित निवास स्थान पर पहुंचे। शाम चार बजे उनकी अंतिम यात्रा भैरोघाट की लिए चली। वहां पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान जिला जज कानपुर देहात धर्मवीर सिंह, एडीजे मो. असलम, एडीजे बीएम त्रिपाठी, भाजपा विधायक सतीश महाना, सपा लोकसभा क्षेत्र प्रत्याशी राजू श्रीवास्तव, बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश सिंह चौहान, लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह चौहान समेत करीब सात सौ लोग मौजूद रहे।

शिक्षा में योगदान
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पं. रामबालक मिश्र ने कई इंटर कालेजों और महाविद्यालयों की स्थापना कराई। कई विद्यालयों का प्रबंधन भी किया। समितियों की अध्यक्षता भी की। वह इन शिक्षा संस्थानों के पदाधिकारी रहे-
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-विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म महाविद्यालय कानपुर
-विशंभर नाथ सनातन धर्म इंटर कालेज कानपुर
-बीएनएसडी शिक्षा निकेतन बालिका विद्यालय मेस्टन रोड कानपुर
-सनातन धर्म विद्यालय भवन विभाग मेस्टन रोड कानपुर
-पं. दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म इंटर कालेज कानपुर
-सेठ मोतीलाल खेड़िया इंटर कालेज विष्णुपुरी कानपुर
-पार्वती दुर्गा प्रसाद बागला सनातन धर्म विद्यालय नवाबगंज कानपुर
-अकबरपुर इंटर कालेज अकबरपुर कानपुर देहात
-अकबरपुर बालिका विद्यालय इंटर कालेज अकबरपुर कानपुर देहात
-अकबरपुर महाविद्यालय अकबरपुर कानपुर देहात
-राम जानकी संस्कृत महाविद्यालय गौरियापुर अकबरपुर कानपुर देहात
-ब्रह्मावर्त सरस्वती संस्कृत महाविद्यालय परमट कानपुर
-ओमर वैश्य प्रबंध समिति केअंतर्गत एमएस मन्नीलाल सरयू प्रसाद, ज्ञान भारती विद्यालय इंटर कालेज बिरहाना रोड कानपुर
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धार्मिक संस्थाओं और न्यास से जुड़े रहे
-श्री राम धाम बिठूर
-श्री हरिधान बिठूर
-श्री सद्गुरु धाम बिठूर
-श्री प्रेम पुजारी (कामदगिरि मुख्य द्वार चित्रकूट)
-संकीर्तन भवन झूसी प्रयाग(प्रभु दत्त ब्रह्मचारी)
-छोटी छावनी अयोध्या (महंत नृत्यगोपाल दास)
-श्री सोमेश्वर दंडी आश्रम खेरेश्वर काकूपुर कानपुर
-श्री राधाश्रम मठ, कबाड़ी मार्केट सरोजनी नगर
-शंकराचार्य मठ जूही
-नारायणी देवी धर्मार्ध औषधालय ट्रस्ट चुन्नीगंज
-उद्बोधन समिति नेहरू नगर कानपुर
-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, रामजन्म भूमि और गो रक्षा
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इन सामाजिक संस्थाओं से जुड़े थे
-बाल सेवा, बालकन जी बारी, बाल सेवक बिरादरी, भारतीय बाल कल्याण संस्थान
-सिद्धि विनायक गणेश मंदिर घंटाघर
-हिन्दी विधि प्रतिष्ठान
-भारत विकास परिषद
-आल इंडिया काउंसिल ऑफ इन्टलेक्चुअल्स
-अध्यक्ष, शिक्षा सुधार समिति नैमिष
-अध्यक्ष, भारत भक्त समाज नैमिष
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कई सम्मान से नवाजे गए
-कानपुर रत्न
-कानपुर सेवा रत्न
-ब्रह्मानंद गौरव
-विद्यावाचस्पति
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बाबू जी के तीन बोल
1-पुरुषार्थ से भाग्य भी बदला जा सकता है। जीवन में निष्ठा का भी विशेष महत्व है। इसलिए वेदांत के कर्म-सिद्धांत में निष्ठा है। वैसे तो धन, दौलत, पद और यश ईश्वराधीन है लेकिन हम कर्म से कभी विमुख न हों। पुुरुषार्थी बने रहें। यह प्रयास तो हमें करते रहना चाहिए।
2-शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। पैसे के अभाव में कोई भी शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए। ऐसा शासकीय स्तर पर होना चाहिए। शिक्षा में नैतिकता का पाठ जरूर पढ़ाया जाना चाहिए। आज शिक्षित होकर निकला बालक कल देश का कर्णधार बनेगा।
3-जातिविहीन समाज की संरचना होनी चाहिए। देश के लिए आरक्षण किसी प्रकार से ठीक नहीं है। आर्थिक आधार पर आरक्षण होना चाहिए। भारतीय संस्कृति केआधार पर धर्म-सम्मत, श्रेष्ठ संस्कारों से युक्त चरित्रवान समाज की संरचना होनी चाहिए।
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पारिवारिक स्थिति
19 अगस्त 1919 को रामबालक मिश्र का जन्म ग्राम तिलौची कानपुर देहात में हुआ। छह जुलाई 1943 से 30 जून 1944 तक उन्होंने शिक्षक की नौकरी की। जुलाई 1944 से उन्होंने वकालत शुरू की थी। उनकी शादी कक्षा नौ में पढ़ाई के दौरान शिवकली से हुई थी। उनकी टीबी से मौत हो गई थी। बाद में अप्रैल 1945 में तीर्थरानी से उनका विवाह हुआ। मिश्र के सात बेटे और एक बेटी हैं। सबसे बड़े बेटे रमाकांत मिश्र अधिवक्ता हैं। वह बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के चेयरमैन भी रह चुके हैं। कृष्णकांत, श्रीकांत मिश्र, शिवकांत, विश्वकांत, हरीकांत और विजयकांत सभी अच्छे ओहदों पर हैं। बेटी पुष्पलता पांडेय हैं।
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वकील बोले, अकेला छोड़ गए ‘भीष्म पितामह’
क्रासर-
अधूरे काम पूरा करने का संकल्प लिया
कानपुर। पं. राम बालक मिश्र के निधन पर वकीलों का कहना है कि ‘भीष्म पितामह’ हमें अकेला छोड़ गए। कचहरी में ज्यादातर वकील पं. राम बालक मिश्र को इसी नाम से पुकारते थे। अधिवक्ताओं ने कहा कि उनके अधूरे काम पूरे काम किए जाएंगे।
बार कौंसिल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष अजय कुमार शुक्ल ने कहा है कि राम बालक मिश्र के निधन से अधिवक्ता समाज को गहरी क्षति हुई है। बार एसोसिएशन अध्यक्ष सुरेश सिंह चौहान ने कहा कि पंडित जी के निधन से वकीलों को झटका लगा है। उन्होंने कई साल से घर के मुखिया की तरह कचहरी संभाल रखी थी। उनकी कमी को भुलाया नहीं जा सकता है। महामंत्री सर्वेश कुशवाहा ने कहा कि बाबू जी कचहरी के स्तंभ थे। उनके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता है। उनके अधूरे कामों को पूरा किया जाएगा। लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह चौहान ने कहा कि शहर के ही नहीं पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं ने अपना संरक्षक खो दिया है। वह हमारे ‘भीष्म पितामह’ थे। उन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकता है। बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री अनूप कुमार द्विवेदी ने कहा कि बाबू जी की कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी सिंह, विजय बख्शी, अश्विनी आनंद, इंदीवर वाजपेयी, गिरीश नारायण द्विवेदी, अनंत शर्मा, वसीम अख्तर, शिवाकांत दीक्षित, कृष्णानंद झा, रंजय सिंह और आशुतोष शुक्ल ने दुख जताया है।
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