कानपुर। रक्षा सामग्री एवं विकास अनुसंधान तथा विकास स्थापना (डीएमएसआरडीई) ने सोमवार को टेक्नोलॉजी डे पर तकनीकी प्रदर्शनी (ओपन हाउस) में अपने दमदार उत्पादों और क्षमताओं का प्रदर्शन किया। जीटी रोड स्थित कैंपस में आयोजित प्रदर्शनी में डीएमएसआरडीई के वैज्ञानिकों ने भारतीय सेना के लिए विकसित किए गए प्रोडक्ट्स पेश किए। स्कूली बच्चों के अलावा उद्यमियों और आम लोगों ने भी इन उत्पादों को उत्सुकता से देखा और जानकारी हासिल की।
डीएमएसआरडीई के डायरेक्टर ए. के. सक्सेना ने बताया कि संस्थान कई ऐसे उत्पादों को विकसित करने में जुटा है, जो सीमाओं पर हमारे सैनिकों की मुश्किलें कम करेंगे। उन्होंने कहा कि हम मोबाइल बंकर बनाने की भी सोच रहे हैं। इस बंकर में नीचे पहिए लगे होंगे और ऊपर शील्ड लगी होगी, जिससे सैनिक अपनी सहूलियत के मुताबिक बंकर को आगे-पीछे ले जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा जोर स्वदेशीकरण पर है। सक्सेना ने बताया कि हम स्टेल्थ पर भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी फाइटर प्लेन स्टेल्थ टेक्नोलॉजी पर ही बनेंगे। प्रदर्शनी में केंद्रीय विद्यालय कैंट, आर्मी पब्लिक स्कूल कैंट, गुरु हरराय एकेडमी, सेंट मैरी अर्थोडॉक्स, वीनापणि इंटर कॉलेज के बच्चे शामिल हुए।
कारगिल में किया कमाल
डीएमएसआरडीई ने बोफोर्स तोपों के लिए साल 1997 में रिक्वाइल फ्लूड (डीएएफसी 60) डेवलप किया था। इससे भारतीय सेना को कारगिल की जंग जीतने में मदद मिली। डीएमएसआरडीई द्वारा विकसित किया गया यह फ्लूड -48 डिग्री सेल्सियस पर भी काम करता है। पहले यह फ्लूड 10,000 रुपये लीटर के दाम पर स्वीडन से आयात किया जाता था। डीएमएसआरडीई द्वारा डेवलप किए गए फ्लूड की कीमत केवल 200 रुपये प्रति लीटर है। डीएमएसआरडीई ने पावर आर्टिलिरीज के क्लूएंट सिस्टम के लिए डीएएफसी 30 (-15 डिग्री सेल्सियस पर काम करता है) और डीएएफसी 50 भी विकसित किया है।
सिल्का गन का कूलिंग सिस्टम
हर मिनट 50 फायर दागकर दुश्मनों के एयरक्राफ्ट नष्ट करने वाली ‘सिल्का गन’ का कूलिंग सिस्टम डीएमएसआरडीई ने विकसित किया है। इतनी बड़ी संख्या में फायर करने के कारण सिल्का गन गर्म हो जाती है, इसे ठंडा बनाए रखने के लिए डीएमएसआरडीई ने इसका कूलिंग सिस्टम विकसित किया।
ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट (बीपीएस)
माइन (बारूदी सुरंग) क्लियर करने के लिए डीएमएसआरडीई ने ब्लास्ट प्रोटेक्शन सूट विकसित किया है। इस जैकेट का वजन 6.5 किलोग्राम है। इस सूट की मदद से सेना के जवान बिना जोखिम उठाए बारूदी सुरंग आसानी से हटा सकते हैं। डीएमएसआरडीई ने सेना को 2,000 बीपीएस की आपूर्ति की है।
बुलेट प्रूफ जैकेट
इस जैकेट का कवर एरिया 4,825 वर्ग सेंटीमीटर है। इसमें 360 डिग्री लेवल का प्रोटेक्शन है। यह सेना के जवानों को फ्रंट, बैक, ग्रोन, नेक और बॉडी कॉलर एरिया में सुरक्षा देती है। इसमें सॉफ्ट आर्मर पैनल (एसएपी) और हार्ड आर्मर पैनल (एचएपी) होते हैं। जैकेट पहने अगर किसी सेना के जवान को 15 मीटर की दूरी से एके-47 की गोली भी लगती है तो उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। एचएपी में बोरान कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है। इस जैकेट का वजन 5.5 किलोग्राम है।
एनबीसी सूट मार्क 4
डीएमएसआरडीई ने न्यूक्लियर बायोलॉजिकल केमिकल (एनबीसी) मार्क 4 सूट विकसित किया है। किसी तरह के न्यूक्लियर और केमिकल हमले में यह सूट जवानों का बचाव करता है। इसका वजन 3 किलोग्राम है। इसका दाम 10,000 रुपये है। साल 2010 में 40,000 सूट का प्रोडक्शन करके इनकी सप्लाई सेना को की गई।
एनबीसी सूट मार्क 5
डीएमएसआरडीई ने एनबीसी मार्क 5 को भी किसी तरह के न्यूक्लियर बायोलॉजिकल केमिकल हमले से बचाव के लिए तैयार किया है। फिलहाल, इसका परीक्षण होना बाकी है। इसका वजन 1.726 किलो है। इसे तैयार करने में गैर बुने फ्रैबिक का इस्तेमाल किया गया है। साथ ही एक्टिवेटेड कार्बन का भी उपयोग हुआ है। डीएमएसआरडीई के डायरेक्टर ए. के. सक्सेना ने बताया कि एनबीसी मार्क 5 में हम वीक न्यूक्लियर को भी पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
बैग स्लीपिंग ग्लेशियर
डीएमएसआरडीई ने द्रास, कारगिल, बटालिक जैसे ग्लेशियर में तैनात सेना के जवानों के लिए खासतौर पर इसे तैयार किया है। यह -50 डिग्री सेल्सियस में जवानों को गर्म रखता है। इसका वजन 1.85 किलोग्राम और कीमत 20,000 रुपये है।
बैग स्लीपिंग ईसीडब्ल्यू
डीएमएसआरडीई ने बैग स्लीपिंग एक्सट्रीम कोल्ड वेदर (ईसीडब्ल्यू) को -10 से -15 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रहने वाले सैनिकों के लिए तैयार किया है। इसका वजन 4.375 किलो है और इसकी कीमत 5,000 रुपये है।
इनर और आउटर ग्लव्स
ग्लेशियर पर तैनात जवानों के लिए डीएमएसआरडीई ने खास ग्लव्स बनाए हैं। ये ग्लव्स -30 से -40 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी सैनिकों को गर्म रखते हैं। साथ ही संस्थान ने खास ग्लेशियर कैप भी बनाई है। इसका वजन 165 ग्राम और कीमत 235 रुपये है।
बूट एंटीमाइन एमके1 और इनफैंट्री
पैरा मिलिट्री फोर्स और सेना के जवानों के लिए यह बेहद उपयोगी है। एंटी माइन ऑपरेशन के दौरान अगर सैनिक यह खास जूता पहनता है और उसका पैर माइन्स पर पड़ भी जाता है तो ब्लास्ट होने पर भी पैर बच जाता है। ब्लास्ट होने पर जूते में भरा सेरेमिक बाहर आ जाता है और ब्लास्ट की कैपेसिटी घट जाती है। प्रति जोड़े इनका वजन 3 किलो से भी कम है।
बुलेट रजिस्टेंस शील्ड
शील्ड को खासतौर पर पैरामिलिट्री फोर्स के लिए बनाया गया है। इसका वजन 3.5 किलो है। पैरा मिलिट्री फोर्स को शील्ड से नक्सलियों से निपटने में मदद मिलेगी। इसका बैलेस्टिक ट्रायल हो चुका है, केवल सप्लाई शुरू की जानी है।
फूड, वाटर कंटेनर
फूड कंटेनर में -20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर भी खाना छह घंटे तक गर्म रहता है। फूड कंटेनर 6.5 लीटर का है। इससे पहले सेना 4.5 लीटर का फूड कंटेनर इस्तेमाल करती रही है। वाटर कंटेनर की क्षमता 20 लीटर है, इसमें पानी 8-10 दिन खराब नहीं होता है। इसकी कीमत 970 रुपये है।
वाटर बॉटल
पॉली कार्बोनेट की बनी इस बोतल में हफ्तों पानी खराब नहीं होता है। डीएमएसआरडीई सेना को इसकी सप्लाई कर रही है। इसकी कीमत 250 रुपये है।
माइल्ड स्टील ज्वाइंट
कम तापमान पर जवानों के बंकरों को कसने के लिए माइल्ड स्टील ज्वाइंट बनाए गए हैं। पहले इस्तेमाल होने वाले ज्वाइंट हवा के दबाव को झेल नहीं पाते थे।