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चौराहों पर लगेंगे कैमरे, मोहल्लों में बनेंगी कमेटियां

Sat, 16 Mar 2013 05:31 AM IST
Kanpur
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‘मैनचेस्टर ऑफ इंडिया’ से ‘डर्टी सिटी’ बनते जा रहे कानपुर में ट्रैफिक की बात करें तो हर शख्स के मुंह से एक ही शब्द निकलेगा ‘पुअर’। सही भी है। शहर बदहाल है। शहरवासियों के सरोकार और समस्याओं की खैर-खबर लेने के अभियान में ‘अमर उजाला’ और ‘ऐलन हाउस’ ग्रुप जब जनता के मुद्दे तलाश रहे थे, तब लाखों लोग जाम में फंसकर ट्रैफिक सिस्टम को कोस रहे थे। इनमें से डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने खत, एसएमएस और ई-मेल करके बेतरतीब ट्रैफिक की समस्या बताई थी। इन जागरूक लोगों को धन्यवाद। इस मुद्दे पर निष्कर्षपूर्ण बहस के लिए शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ ने फजलगंज स्थित अपने कार्यालय में ट्रैफिक, नगर निगम के अफसरों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्टूडेंट्स और आम नागरिकों को आमंत्रित किया। चर्चा के दौरान समस्याएं उभरीं तो उनके निवारण के सुझाव भी आए। जाम से जूझती जनता के तीखे सवालों का जवाब भी अफसरों ने दिया। संवाद के दौरान अफसरों ने ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में कुछ ठोस निर्णय लिए। उनके फैसलों पर कारोबारियों ने मुहर ही नहीं लगाई बल्कि साथ चलने का वादा भी किया। आइए पढ़ते हैं यह रिपोर्ट-
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कानपुर। शहर का ट्रैफिक सुधारने के लिए नगर निगम सभी 110 वार्ड में 11 सदस्यीय कमेटी का गठन करेगा। ये कमेटियां अवैध कब्जों, रोड कटिंग और निर्माण कार्यों पर नजर रखेंगी। शहर के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे, जो ट्रैफिक अराजकता के जिम्मेदार लोगों पर नजर रखेंगे। सड़कों और बाजारों में खड़े वाहन हटाने के लिए ट्रैफिक विभाग निजी कंपनियों से 40 क्रेन हायर करेगा।
बेतरतीब ट्रैफिक को लेकर ‘अमर उजाला’ कार्यालय में हुई परिचर्चा में अफसरों ने जब यह फैसले लिए तो कारोबारी क्यों पीछे रहते। वे खुद अफसरों के साथ चलकर अपनी दुकान के फुटपाथ और आसपास के इलाकों से अतिक्रमण हटाने को तैयार हो गए। उन्होंने शर्त भी रखी कि दोबारा अतिक्रमण न होने दिया जाए। परिचर्चा में एसपी ट्रैफिक मनीराम सिंह ने स्वीकार किया कि समस्याएं हैं। सड़कों पर कब्जे, टेंपो चालकों की अराजकता, खुदाई, बदहाल सड़कें और ट्रैफिक विभाग में स्टाफ की कमी के चलते सिस्टम काम नहीं कर पा रहा। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक समस्या के लिए जनता भी उतनी ही जिम्मेदार है। सबको जल्दी रहती है। लोग नियम-कानून और लाइन तोड़ देते हैं।
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नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता प्रभारी सीपी शुक्ला ने कहा कि शहर का ट्रैफिक सुधारने के लिए ट्रांसपोर्टनगर की शिफ्टिंग, सड़क किनारे सजी फल और सब्जी मंडियों के वैकल्पिक स्थान तय करने के साथ ही पार्किंग की व्यवस्था करनी होगी। अतिक्रमण पर पुलिस को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्होंने कहा कि ‘अभी हम अवैध कब्जे हटाते हैं और कुछ घंटे बाद दोबारा कब्जे हो जाते हैं। यह जिम्मेदारी संबंधित थाना प्रभारी की है। थानेदार ध्यान नहीं देते इसलिए अभियान सफल नहीं होते’। महापौर के प्रतिनिधि और नगर निगम के सदन में भाजपा पार्षद दल के नेता सत्येंद्र मिश्रा ने पार्किंग समस्या और टेंपो अराजकता को ट्रैफिक की राह में रोड़ा बताया। उन्होंने अफसर, जनप्रतिनिधि और जनता को इस समस्या पर एक साथ खड़े होने की जरूरत जताई।
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के चेयरमैन सुरेंद्र सनेजा ने खराब सड़क और पार्किंग को बड़ी समस्या बताया। बाजारों के फुटपाथ पर अतिक्रमण की समस्या से निपटने के लिए उन्होंने अफसरों का साथ देने का वादा किया। वे बोले, ‘अतिक्रमण हटवाने वह खुद साथ चलेंगे। पुलिस और सरकारी महकमे के लोग मार्किंग करा दें, उन स्थानों से कब्जे हटवाए जाएंगे। बस यह देखना होगा कि दोबारा अतिक्रमण न हो’। उन्होंने कारोबारियों की तरफ से पुलिस को आर्थिक सहयोग करने का भी वादा किया। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष भूपेश अवस्थी ने सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, ‘एक सड़क बनती है, जिसे तीन महीने बाद ही कोई न कोई विभाग खोद देता है। सरकारी विभागों में तालमेल की कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है’। उन्होंने शहर के इंट्री प्वाइंट्स पर अतिक्रमण की समस्या भी उठाई।
एडवोकेट विष्णु शुक्ल ने कहा कि शहर में वाहन तो दूर पैदल चलने वालों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वाहन चलाते वक्त लोग नियम ध्यान रखें तो ट्रैफिक की समस्या न हो। इस मौके पर अफसरों से सवाल-जवाब हुए तो कुछ लोगों ने सुझाव भी दिए।

कोट्स::::::::::::::::::::::
रोड इंजीनियरिंग हो : मनीराम
शहर का ट्रैफिक सुधारने के लिए रोड इंजीनियरिंग की जरूरत है। फ्लाईओवर, वन-वे और नो-इंट्री का क्या सिस्टम हो, यह स्पष्ट करना जरूरी है। ट्रैफिक विभाग ने 18 चौराहों पर सिग्नल लगाए हैं। ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए प्रमुख चौराहों पर रस्सी लगाई जा रही है। सड़क पर खड़े वाहन हटाने के लिए निजी कंपनियों से 40 क्रेन भी ले रहे हैं।

अतिक्रमण नहीं, पार्किंग सही : सीपी शुक्ला
अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या दूर हो जाए तो ट्रैफिक काफी सुधर सकता है। नगर निगम कब्जे हटाने में लाखों रुपये फूंकता है लेकिन फिर कब्जे हो जाते हैं। थानेदार ध्यान नहीं देते जबकि शासनादेश में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। पार्किंग के लिए अलग से व्यवस्था करनी होगी।

वार्ड कमेटियां देखेंगी अतिक्रमण : सत्येंद्र मिश्रा
सुगम ट्रैफिक की राह में अतिक्रमण सबसे बड़ी समस्या है। नगर निगम सभी वार्ड में 11 सदस्यों की कमेटियां बना रहा है। ये कमेटियां अपने वार्ड में अवैध कब्जे, रोड कटिंग और निर्माण कार्यों की निगरानी करेंगी। कहीं भी गड़बड़ी पाए जाने या काम समय से पूरा न होने पर इन कमेटियों के सदस्य महापौर या नगर आयुक्त को जानकारी देंगे।

पार्किंग का इस्तेमाल करें लोग : सुरेंद्र सनेजा
दिल्ली के चांदनी चौक में पार्किंग स्थल देखिए। वहां लोग गाड़ियां खड़ी करके पैदल चांदनी चौक तक जाते हैं। ऐसा शहर में क्यों नहीं हो पा रहा है। ऐसा हो जाए तो समस्या का काफी हद तक समाधान होगा, लेकिन विडंबना है कि पार्किंग है ही नहीं। बाजार की फुटपाथों से कब्जे भी हटाए जाने चाहिए।

एक अफसर की जिम्मेदारी तय हो : भूपेश अवस्थी
सड़क बनती है। कुछ दिन बाद टेलीफोन वाले खोद देते हैं। फिर बिजली वाले फिर कोई और खोद जाता है। साफ है विभागीय तालमेल नहीं है। जवाब कोई नहीं देता। इसके लिए किसी एक अफसर की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह भी फैसला होना चाहिए कि जो सड़क बन जाए, उसमें एक साल तक कोई कटिंग न हो।

घर पर भेजा जाए चालान : विष्णु शुक्ल
ट्रैफिक के नियम-कानून इसलिए टूटते हैं क्योंकि लोगों में कार्रवाई का भय नहीं है। मौके पर चालान कम हो रहे हैं। कुछ ऐसा हो कि ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के घर पर चालान भेजा जाए। इससे ट्रैफिक पुलिस का भय होगा और लोग नियम से चलेंगे।
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