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चोरी खोलो, 5 तोला सोना पाओ

Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
Kanpur
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कानपुर। कल्याणपुर थाने के पीछे किन्नर बिंदू वारसी हिजड़ा के घर हुई चोरी में पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं है। मंगलवार को डीआईजी नगर अमिताभ यश थाने पहुंचे तो किन्नर भी 10-12 की संख्या में आ गए। बिंदू एक चेली के साथ डीआईजी से मुखातिब हुई, बोली: साहब आप लोगों को हमारी दुआएं हैं। खुश रहें, ओहदा बढ़े। अब 5 रुपए नेग दे दीजिए, यह कहते हुए बिंदू की आंखों में आंसू छलक आए। डीआईजी ने 100 रुपए निकाला और देने लगे। बिंदू ने हाथ बढ़ाया लेकिन लेने के लिए नहीं, रोकने के लिए। बोली: साहब नेग देना ही है तो हमारी चोरी खुलवा दीजिए। डीआईजी ने तुरंत विवेचक को बुलाया और पूछताछ की। इस पर बिंदू ने वहीं ऐलान किया कि जो भी सिपाही और दरोगा उनके घर का चोर पकड़ेगा, उसे वह पांच तोला सोने की जंजीर देगी।
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डीआईजी नगर मंगलवार को अपरान्ह करीब चार बजे कल्याणपुर थाने पहुंचे थे। उन्होंने प्रभारी के कार्यालय कक्ष का उद्घाटन किया और परिसर में नीम का पौधा लगाया। मातहतों को नसीहत दी कि नीम कड़वा होते हुए भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। हमारी पुलिस को भी जनता के प्रति ऐसा होना होगा। पौधरोपण के बाद डीआईजी नगर उसी कक्ष में बैठे। उन्होंने सिपाही के घर हुए लाखों की चोरी के मामले में हर स्तर पर जांच करने की बात कही। अपराध की चर्चा हो रही थी तभी किन्नर पहुंचे और अपनी बात कही। डीआईजी ने बिंदू वारसी हिजड़ा को आश्वस्त कर घर भेजा। मातहतों से बोले: किसी भी हालत में इसका खुलासा कीजिए, जो मदद चाहिए दी जाएगी। बता दें कि 19 नवंबर की रात किन्नर बिंदू वारसी हिजड़ा के घर करीब 40 लाख की चोरी हुई थी। इसमें आठ लाख रुपए नकद, एक किलो सोना और ढाई किलो चांदी थी। डीआईजी ने इस दौरान सिपाहियों, मुंशी से भी उनकी समस्याएं पूछीं।
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इनसेट:
...जब डीआईजी पहुंचे थे प्रार्थना पत्र देने
कानपुर। कल्याणपुर में पुलिस और समाजसेवी जुटे थे। इसी बीच डीआईजी ने मातहतों को नसीहत देने के लिए अपना ही एक वाकया सुनाया। बोले: जिस थाने में पहली बार प्रार्थना पत्र देने आया वहीं का अब कप्तान हूं। यह एक संयोग ही है। उन्होंने कहा कि तब वह यहीं आईआईटी में पढ़ते थे। उनके खाते से 27सौ रुपए कहीं ट्रांसफर हो गए। मैं प्रार्थना पत्र लिखकर लाया। थाने के सामने खड़ा हो गया। सामने बैठे एसएचओ व्यस्त थे। तभी अचानक उनके पास कप्तान का फोन आया। किसी बात पर उधर से डांट पड़ी तो एसएचओ ने दो मिनट तक सर सुनाई नहीं दे रहा है। आवाज कट रही है, कहा फिर मेज पर रखे फोन पर चोंगा पटक दिया। ताज्जुब था कि मैं दो-तीन मीटर दूर खड़ा कप्तान की आवाज साफ सुन रहा था लेकिन थानाप्रभारी साहब नहीं सुन पा रहे थे। वाकया के साथ नसीहत देने की इस शैली की चर्चा बाद में भी होती रही।
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