कानपुर। गंगा समग्र अभियान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के नए बदले हुए ‘वैचारिक खाके’ का पहला ‘प्रयोग’ है। संघ ‘देश गुरु’ बनने की प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत कर रहा है। गंगोत्री से गंगा सागर तक कुल पांच हजार किमी घेरे की मानव श्रृंखला में सिर्फ संघ परिवार के हिंदूवादी संगठन नहीं रहेंगे। इसमें हर जाति, संप्रदाय, मजहब, वर्ग के लोग नजर आएंगे। लेकिन इस मानव श्रृंखला में न तो किसी समाज के नारे लगेंगे और न ही किसी राजनीतिक पार्टी के, सिर्फ गंगा को निर्मल और अविरल बनाने का संकल्प लिया जाएगा।
समग्र गंगा यात्रा के पूरा होने के बाद अब संघ के 40 अनुषांगिक संगठन और भाजपा मानव श्रृंखला को सफल बनाने में जुट गई है। भाजपा ने अपने सारे कार्यक्रमों को दरकिनार कर दिया है। इस संबंध में बुधवार को भाजपा कार्यालय में गंगा समग्र कार्यक्रम के प्रमुख काशीराम स्थिति का जायजा लेंगे। प्रत्येक संगठन अपनी अलग-अलग बैठक कर रहा है। 2 दिसंबर को मानव श्रृंखला सवा घंटे तक बनाई जाएगी। इसके बाद सारे व्यक्ति गंगा को निर्मल और अविरल बनाने का संकल्प लेंगे। साध्वी उमा भारती सरसैया घाट पर महाआरती करेंगी।
‘संघ सबके लिए है’ यह संदेश सर संघ चालक मोहन मधुक6र राव भागवत ने शहर के चार दिवसीय प्रवास के दौरान अपने हर उद्बोधन में देने का प्रयास किया। इसके साथ ही वह गंगा समग्र अभियान का जिक्र करना भी नहीं भूले थे। कई सत्रों में चली प्रचारकों, भाजपा विधायकों, पदाधिकारियों की बैठक में संख प्रमुख ने गंगा समग्र पर जोर दिया था। संघ की निगरानी में होने वाला यह कार्यक्रम सर्व समाज के लिए है। यह प्रयास है कि इसमें सभी वर्गों और संप्रदायों की भागीदारी हो। इसके आयोजन में बहुत एहतियात और सख्ती बरती जा रही है।
भाजपा को अपने झंडे लगाने तक की इजाजत नहीं है, नारों की बात तो दूर है। गंगा-जमुनी तहजीब को संघ गंगा समग्र में बरकरार रखना चाहता है। बैठकों में अभियान प्रमुख काशीराम ने कहा कि इसमें सभी वर्ग के मुखिया गंगा आरती करें जिससे वह वर्ग गंगा आंदोलन से जुड़े। इस संबंध में होने वाली सारे संगठनों की तैयारी की समीक्षा संघ के पदाधिकारी कर रहे हैं।