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वर्ष 1998 में चर्चा में आया था बाबा का आध्यात्मित विद्यालय

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फर्रुखाबाद। नई दिल्ली के विजय विहार स्थित आध्यात्मिक विश्वविद्यालय सनसनीखेज मामले की जड़ें फर्रुखाबाद से जुड़ीं हैं। आश्रम के संचालक वीरेंद्र देव दीक्षित का कंपिल में गंगा रोड स्थित आध्यात्मिक ईश्वरीय विद्यालय 1998 में पहली बार चर्चा में आया था। यहां कोलकाता से लाई गई युवती को बंधक बनाने और उसके साथ यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगा था। वीरेंद्र देव दीक्षित के खिलाफ यौन उत्पीड़न, पुलिस से मुठभेड़ समेत अन्य संगीन धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं।
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कंपिल के अलावा शहर फर्रुखाबाद में सिकत्तरबाग मोहल्ले में वीरेंद्र देव दीक्षित का आश्रम है। कंपिल क्षेत्र के गांव चौधरियान निवासी सोहन लाल दीक्षित के दो बच्चे वीरेंद्र देव दीक्षित और दूसरी पुत्री थी। सोहन लाल ने पुत्री की शादी शमसाबाद क्षेत्र में की थी। 1975 में वीरेंद्र देव का अपने पिता से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। इससे नाराज होकर विरेंद्र देव घर से चले गए थे। 1984 में पिता की मृत्यु के बाद वीरेंद्र देव लौट कर कंपिल आए


और अपने पैतृक मकान में स्थानीय कुछ लोगों के सहयोग से आध्यात्मिक कार्यक्रम शुरू किया। कुछ समय बाद ही उन्होंने आश्रम का निर्माण कराया। यह आश्रम पहली बार 1998 में चर्चा में आया। तब से आश्रम में गतिविधियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं । 30 मार्च 1998 को कोलकाता की युवती के माता पिता ने कंपिल थाने में तत्कालीन थानाध्यक्ष विजय सिंह यादव को पुत्री को आश्रम में बंधक बनाने की शिकायत की थी।
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पीड़ित माता-पिता ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गुरुबचन लाल से भी मामले में न्याय की गुहार लगाई थी। तब पुलिस ने आश्रम में छापेमारी की। पीड़ित युवती को बरामद कर नारी निकेतन भेजा था। आश्रम के 11 सेवादारों पर शांतिभंग की कार्रवाई की थी। 3 अप्रैल को अहमदाबाद के एक व्यक्ति ने पुत्री को बरगलाकर आश्रम में दुष्कर्म और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए वीरेंद्र देव दीक्षित, उनकी पत्नी कमलना व कर्नाटक की एक महिला के


खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। 16 अप्रैल को मथुरा की महिला की तहरीर पर वीरेंद्र देवी, कमला समेत तीन के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। वीरेंद्र को पकड़ने के लिए जब पुलिस ने छापा मारा तो आश्रम के सेवादार पुलिस से भिड़ गए थे। मामले में पुलिस ने वीरेंद्र देव व सेवादारों समेत आठ लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। चार-पांच वर्ष पूर्व सिकत्तर बाग स्थित आश्रम में भी युवती को बेधक बनाने का



मामला चर्चा में आया था। तत्कालीन जिलाधिकारी मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराई थी। जबरन युवती को रखने के मामले में प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस ने आश्रम में जब छापेमारी की तो विवाद हो गया था। लेकिन मामला कुछ दिन चलने के बाद दब गया था।


स्थानीय लोगों का कहना है कि वीरेंद्र देव दीक्षित का आश्रम कई बार चर्चा में आया, लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस हकीकत का खुलासा नहीं कर सकी। वीरेंद्र देव दीक्षित का सिकत्तर बाग और कंपिल में स्थित आश्रम किले के समान है। आश्रम का गेट हर समय बंद रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आश्रम में कई महिला और किशोरियां है। लेकिन कभी आश्रम के बाहर निकलतीं नजर नहीं आती है। आश्रम के अंदर क्या हो रहा है, कोई नहीं जानता है। आश्रम किले के समान है। इसमें चिड़िया भी पर नहीं मार सकती है।
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1998 में चर्चा में आया था वीरेंद्र देव दीक्षित का आश्रम
कोलकाता की युवती को जबरन बंधक बनाने व यौन शोषण का लगा था आरोप
सिकत्तरबाग और कंपिल स्थित आश्रम किले के समान हैं, अंदर क्या हो रहा है, कोई नहीं जानता
अमर उजाला ब्यूरो
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