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मासूम बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़

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उन्नाव। स्कूलों में परिवहन नियमों की अनदेखी कर निजी वाहन चालक मानक से अधिक बच्चों को बैठाकर उनकी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। मासूमों की जिंदगी के प्रति न तो प्रशासन सजग है न ही स्कूल प्रबंधन। सिस्टम व हनक के बलबूते कमाई का धंधा खूब फल फूल रहा है। जिम्मेदारों की अनदेखी किसी भी दिन बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
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शहर हो या कस्बे में संचालित निजी स्कूल हर जगह पढ़ाई के पैकेज के साथ आने जाने के साधन का पैकेज भी दे रहे हैं। स्कूल संचालक हर महीने फीस के साथ साधन में भी मोटी रकम बचा रहे हैं। वहीं निजी वाहन ठेकेदार भी आने जाने के साधन में अतिरिक्त बचत का फायदा उठाने के लिए क्षमता से दो गुना बच्चों को बिठाने में कोई हिचक नहीं करते। मालूम हो कि शहर के करीब आधा सैकड़ा स्कूल ऐसे हैं जिसमें बच्चों को उनके घर से स्कूल लाने और ले जाने के लिए प्राइवेट बस, वैन या टेंपो संबद्ध हैं।

आवागमन की सुविधा के नाम पर हर महीने मोटी रकम वसूलने वाले इन वाहन चालकों व वाहन उपलब्ध कराने वाले ट्रांसपोर्टरों की हालत खस्ता है। न तो सही सीटें हैं और न ही उनका रंग पीला है। और तो और वाहन की फिटनेस, गैस किट की गुणवत्ता और फर्स्टएड बाक्स और आग बुझाने के उपकरण शायद ही किसी वाहन में मिलें। जिन वाहनों में लगे होते हैं व महज दिखावे के लिए। कुछ ही स्कूल वाहन मानकों को पूरा कर शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं।
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बच्चों की जान जोखिम में डाल हर माह हजारों की कमाई कर जेब भर रहे है स्कूली वाहनों की धरपकड़ के लिए परिवहन विभाग के साथ ही पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। वाहन मालिक परिवहन नियमों की अनदेखी कर बच्चों की जिंदगी खतरे में डालकर सड़कों पर फर्राटा भर कमाई कर रहे हैं।

अभियान में लापरवाही नहीं
एआरटीओ प्रशासन एके पांडेय ने बताया कि स्कूल वाहनों के खिलाफ सड़कों पर लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में किसी तरह की खामी नहीं बरती जाएगी। फिर भी परिवहन नियमों को दरकिनार करने वाले वाहन चालकों को किसी भी हाल में बक्शा नहीं जाएगा।
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-स्कूलों के वाहन चालक ओवरलोडिंग कर छात्रों की सुरक्षा में कर रहे अनदेखी
अमर उजाला ब्यूरो
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