सरसंघ चालक मोहन भागवत के आगमन को लेकर एक बार फिर कानपुर में संघ को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पुराने संघी लोगों से लेकर नए गणवेशधारी सभी उत्साह में नजर आ रहे हैं।
जनपद में संघ की सक्रियता 75 वर्ष से भी अधिक पुरानी है। जब अनंतराव गोखले ने यहां पर संघ का कार्य प्रारंभ किया। वह यहां प्रचारक के तौर पर आए थे।
उन्होंने यहां के कई प्रमुख लोगों को जोड़कर स्थानीय संगठन की प्रक्रिया पूरी की। जिसमें बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह, इंद्रजीत जैन जैसे लोगों का नाम शामिल है।
उप्र में संघ को खड़ा करने के लिए जब तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहब देवरस जगह जगह वर्ग लगाकर लोगों को हिंदुत्व और उसकी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे।
उसी समय अनंतराव को कानपुर में प्रचारक की जिम्मेदारी मिली। तब से लेकर अब तक यह शहर संघ की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
रज्जू भइया, सुदर्शन जी जैसे अनेक संघ के पदाधिकारी अलग अलग समय पर यहां आकर अपना संबोधन देते रहे। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक सिंघल ने भी संघ के विभाग प्रचारक के रूप में 18 वर्षों तक कार्य किया।
सबसे ज्यादा समय तक वह कानपुर में रहे। ऐसे अनेक पदाधिकारी हैं, जिन्होंने संघ की विचाराधारा से जुड़कर शहर को संघ के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ जोड़ने में विशेष भूमिका निभाई।