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20 प्रतिशत स्कूली बच्चों को अस्थमा

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माई सिटी रिपोर्टर कानपुर । 20 प्रतिशत स्कूली बच्चे अस्थमा से पीड़ित है। यह बढ़ते बच्चों में शारीरिक, मानसिक कमियों केई वजह हो सकते हैं । शहर की प्रदूषित हवा इसे बढ़ने के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। ये जानकारी रविवार को वेबीनार के माध्यम से वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉक्टर शिवाकांत मिश्रा ने नगर और देहात के विभिन्न स्कूलों के प्रबंधको, शिक्षकों, अभिभावकों को दी। लंग्स केयर फाउंडेशन की तरफ से डॉक्टर फॉर क्लीन एयर अभियान के तहत अस्थमा प्रतिक्रिया प्रशिक्षण डिस्टल कार्यशाला आयोजित की गई। डॉ एसके मिश्रा ने बताया कि स्कूलों में बच्चों को अस्थमा से हालत बिगड़ने की स्थिति में वह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डीआईओएस सतीश तिवारी ने बताया कि देश कोरोना महामारी का सामना कर रहा है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है। स्कूली बच्चों में अस्थमा की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय है। इससे उनके प्रदर्शन भी प्रभावित हो सकता है। शिक्षक और माता-पिता अस्थमा पीड़ित बच्चों को सामान्य जीवन जीने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने सभी विद्यालयों को अस्थमा रिस्पांस किट से लैस करने की बात कही। बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के निदेशक डॉ अंगद सिंह ने बताया कि नगर और देहात के 100 से ज्यादा स्कूलों के शिक्षक अभिभावक डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। पलमोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के सीनियर कंसलटेंट डॉ अशोक कुमार सिंह ने अस्थमा के लक्षण दवाओं की जानकारी दी। स्कूल में किसी बच्चे को अस्थमा का दौरा पड़ने की स्थिति में स्कूल के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना बताई। इसमें एमपी शेट्टी पूजा अवस्थी आदि शामिल रही।
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