कानपुर। मारपीट के 19 साल पुराने मुकदमे में गैरइरादतन हत्या के दोषी को विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम प्रथम की कोर्ट ने पांच साल कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषी 70 साल का बुजुर्ग है जबकि सिर्फ दूध के बकाया 180 रुपये के लेनदेन के विवाद में युवक की जान चली गई थी।
बर्रा के तात्या टोपेनगर निवासी सीताराम सोनी के पड़ोस में रहने वाला दद्दू दूध का काम करता था। तीन अक्तूबर 2006 की सुबह सात बजे दद्दू दूध का बकाया 180 रुपये लेने के लिए सीताराम के पास पहुंचा। सीताराम ने उसे दो-तीन दिन में रुपये देने की बात कही। दोनों में विवाद होने लगा। पास में खड़ा बिठूर के दयालपुर गांव का रहने वाला अमर सिंह यादव पहुंचा और दद्दू का पक्ष लेकर गाली-गलौज करने लगा।
मना करने पर दोनों ने पास में पड़े डंडे से सीताराम के सिर पर वार कर दिया जिससे सीताराम की बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। सीताराम के बेटे पवन ने बर्रा थाने में अमर व दद्दू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एडीजीसी ने बताया कि विवेचना के बाद सिर्फ अमर सिंह यादव के खिलाफ ही चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से मृतक की पत्नी व बेटे समेत छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने अमर को दोषी मानकर सजा सुनाई।
कोर्ट ने दिए विवेचक पर कार्रवाई के निर्देश
कोर्ट ने कहा कि दूध का विवाद दद्दू से हुआ था। दद्दू और सीताराम के बीच गाली-गलौज हो रही थी तभी अमर बीच में आ गया और मारपीट के दौरान सीताराम की जान चली गई। विवेचक ने अमर के खिलाफ चार्जशीट भेजी लेकिन दद्दू को क्लीनचिट दे दी। इससे साफ है कि विवेचना में घोर लापरवाही बरती गई। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और डीजीपी लखनऊ व डीएम को आदेश की प्रति भेजते हुए विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।