आजादी के 67 वर्ष बाद भी जिले के ऐसे कई गांव और मजरे हैं जहां बिजली की
रोशनी नहीं पहुंची। बिजली की आस में गांवों की कई पीढ़ियां गुजर गई।
इन
गांवों में नाते, रिश्तेदार, शादी ब्याह सभी खुशियां हासिए पर आ गई है।
उम्र के आखिरी पड़ाव पर जीवन यापन कर रहे वृद्धों को आस है कि उनके जिंदा
रहते गांव में रोशनी आ जाए।
उनकी पीढ़ी गांव में निवास कर सके।
लड़की हो या लड़का, इन गांवों में लोग रिश्ता करने से भी कतराते हैं। दूसरी
ओर बिजली विभाग के अधिकारी द्वितीय फेस में विद्युतीकरण पूरा होने का दम
भर रहे हैं।
कसबे के टुर्रा गांव में लड़की नहीं लड़के की शादी
करना किसी मुसीबत से कम नहीं है। टुर्रा गांव के छेदीलाल बताते हैं कि गांव
में लड़के की शादी के लिए आने वाले लोग लड़के की कुंडली बाद में पहले
बिजली की बात करते हैं। गांव में बिजली न होने से कई बार बहाना बनाकर लौट
जाते है।