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Kanpur News: आईआईटी का 66वां स्थापना दिवस आज, 21 प्रतिभाओं का होगा सम्मान

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कानपुर। आईआईटी कानपुर दो नवंबर को अपना 66वां स्थापना दिवस मनाएगा। मुख्य अतिथि के रूप में आदिल जैनुलभाई चेयरपर्सन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स आईआईटी रोपड़ एवं आईआईटी गोवा शिरकत करेंगे। मुख्य समारोह में 21 प्रतिभाओं को इंस्टीट्यूट फेलो, डिस्टिंग्विश्ड एलुमनाई अवार्ड, डिस्टिंग्विश्ड सर्विस अवार्ड और यंग एलुमनाई अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा और सीएम योगी के सलाहकार अवनीश अवस्थी शामिल हैं।
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इसके अलावा कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रो. वेंकटेश सुंदर्शन, राड आइजलैंड यूनिवर्सिटी के प्रो. अरिजीत बोस, कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी की डा. रेमा पद्मन, मेटा एक्सेप्चियल मैनेजमेंट के संस्थापक डाॅ. दीपक नरूला, आइआइएम बंगलूरू के प्रो. ऋषिकेश टी कृष्णन, पोशमार्क के संस्थापक मनीष चंद्रा, एक्यूरैकैप कंसल्टेंसी सर्विसेस के संस्थापक डाॅ. नरेश चंद गुप्ता, इंवेस्टकार्प के वाइस चैयरमैन ऋषि कपूर, फोरटैनिक्स एंड सिंबयिन के संस्थापक अंबुज कुमार, आईआईटी बांबे के प्रो. अमित अग्रवाल को विशिष्ट एलुमनाई अवार्ड दिया जाएगा। इसके साथ ही संस्थान का यंग एलुमनाई अवार्ड 2009 बैच के बीटेक छात्र अभिनव जैन फाउंडर एंड सीईओ शाप 101, बैच 2010 के प्रो. दिनेश भरडिया एसोसिएट प्रोफेसर यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डियागो, 2011 बैच के डाॅ. ईशान चट्टोपाध्याय एसोसिएट प्रोफेसर कार्नेल यूनिवर्सिटी और 2013 बैच के बीटेक छात्र भावेश मित्तल को दिया जाएगा।

पूर्व छात्रों की मदद से तैयार हो रहा मेडिकल कॉलेज
आईआईटी कानपुर चिकित्सा क्षेत्र में भी कदम रख रहा है। पूर्व छात्रों और शिक्षकों के सहयोग से तैयार हो रहा गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी न केवल आईआईटी कानपुर का पहला मेडिकल कॉलेज है बल्कि यह विज्ञान और चिकित्सा के समागम का एक अद्वितीय उदाहरण भी है। दो नवंबर 1959 में स्थापित आईआईटी कानपुर ने देश को विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान की राह पर अग्रसर करने में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। अब गंगवाल स्कूल के माध्यम से संस्थान चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नई इबारत लिखने जा रहा है। आधुनिक उपकरणों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर से सुसज्जित यह संस्थान देश में चिकित्सा अनुसंधान का केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गंगवाल स्कूल की सबसे बड़ी उपलब्धि देश का पहला कृत्रिम हृदय ‘हृदयंत्र’ है। इसे आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। यह अत्याधुनिक हृदय यंत्र अपनी सटीक डिजाइन और कम ऊर्जा खपत के कारण वैश्विक स्तर पर सबसे सस्ता और उपयोगी कृत्रिम हृदय बनने की क्षमता रखता है। पशुओं पर इसके परीक्षण के लिए सीसीएसईए में आवेदन किया जा चुका है, और अनुमति मिलते ही यह चिकित्सा इतिहास का नया अध्याय लिखेगा। इसके साथ ही स्कूल में रीढ़ की विकृति (स्कोलियोसिस) के इलाज के लिए 3डी प्रिंटेड इंटरबॉडी स्पेसर और एकल ऑप्टिकल फाइबर आधारित एंडोस्कोप जैसे अभिनव प्रोजेक्ट्स पर भी कार्य जारी है।
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