कानपुर देहात। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच मरीजों के उपचार में रेमडेसिविर इंजेक्शन का भी खूब प्रयोग किया गया। इस दौरान इंजेक्शन की कालाबाजारी की भी खूब शिकायतें सामने आईं। जिले के सरकारी व निजी चिकित्सालयों में भी रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीजों को लगाए गए। इसमें एक ही अस्पताल में 66 मरीजों को इंजेक्शन लगाए जाने की जानकारी पर डीएम ने हैरानी जताई।
कलेक्ट्रेट में हुई बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी प्राइवेट अस्पतालों में दिए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन का मरीज सहित पूरा ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में एक साल से 18 वेंटिलेटर क्रियाशील नहीं कराने की रिपोर्ट शासन में भेजने की जानकारी दी।
कलेक्ट्रेट में सोमवार की सुबह हुई टीम 9 की बैठक में डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने मरीजों को अब तक लगाए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन के बारे मेेें जानकारी ली। डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा ने बताया कि 129 रेमडेसिविर इंजेक्शन कोविड एल-टू अस्पताल, 21 कोविड एल-वन अस्पताल व 80 प्राइवेट अस्पतालों में दिए गए हैं। जिन्हें मरीजों को लगाया गया है।
कोरोना मरीजों का इलाज करने के लिए सिर्फ पांच प्राइवेट अस्पताल ही चिह्नित थे। डीएम ने अकबरपुर के एक निजी अस्पताल में सबसे अधिक 66 रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि उनके व एडीएम प्रशासन के स्तर से प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती 12 मरीजों को इंजेक्शन दिए जाने की संस्तुति की गई। फिर इतने बड़े पैमाने पर किस आधार पर इंजेक्शन दिए गए।
उन्होंने सभी प्राइवेट अस्पतालों में दिए गए रेमडेसिविर इंजेक्शन का मरीज सहित पूरा ब्योरा मांगा है, जिससे सत्यापन कराया जा सके। बैठक में सीडीओ सौम्या पांडेय, एडीएम प्रशासन पंकज वर्मा, डिप्टी सीएमओ डॉ. महेंद्र जतारया, डीपीआरओ अनिल कुमार, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट साक्षी शर्मा आदि उपस्थित रहे।
दवाओं की ओवररेटिंग पर कार्रवाई के निर्देश
कानपुर देहात। कोरोना काल में निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर दवा बिक्री की शिकायतों पर अभी तक कार्रवाई न होने पर डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देशित किया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी रैंडम आधार पर छापामारी करें। जो मेडिकल स्टोर संचालक अधिक दाम पर दवा बेचते पाए जाएं, उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएं।
रेमडेसिविर इंजेक्शन लगने का नहीं हुआ सत्यापन
कानपुर देहात। प्राइवेट अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाए जाने के बाबत स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक सत्यापन भी नहीं कराया गया है। जबकि कई जिलों में इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाने के बावजूद प्राइवेट अस्पतालों की ओर से मरीजों को नहीं लगाए जाने की घटनाएं उजागर हुई।
वहीं मरीजों के तीमारदारों को भी इस बाबत जानकारी नहीं कि उनके मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया भी गया या नहीं। इस बाबत डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा ने कहा कि प्राइवेट अस्पताल का पर्चा मिलने पर रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाता है। मरीज को इंजेक्शन लगाया गया या नहीं फिलहाल इसका सत्यापन नहीं कराया गया है।
प्राइवेट अस्पतालों मेें कोविड मरीजों के लिए दो सौ बेड
कानपुर देहात। कोरोना मरीजों का इलाज करने के लिए जिले में चिह्नित प्राइवेट पांच अस्पतालों में एल लेवल के 111, एल-टू व एल-थ्री लेवल के कुल 89 बेड हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार उक्त अस्पतालों में अभी तक करीब तीन सौ मरीज भर्ती किए गए हैं। जिनमें गंभीर व अति गंभीर मरीज शामिल हैं। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाया जाता है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा कि अति गंभीर कितने मरीजों को इंजेक्शन लगाया गया, इसका लेखाजोखा स्वास्थ्य महकमे के पास भी नहीं है।
अपनी ही कथनी में फंस रहे अफसर
कानपुर देहात। कालाबाजारी रोकने व व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन देने के लिए प्रशासनिक अफसरों की ओर से स्वीकृति देने की व्यवस्था की गई। इस बात को नर्सिंग होम पंजीयन अधिकारी/डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी वर्मा भी मान रहे हैं। इसके बावजूद भी इंजेक्शन रेवड़ी की तरह बांटे गए।
यह बात जिलाधिकारी को भी समझ नहीं आ रही। जबकि डीएम स्तर से आठ व एडीएम प्रशासन ने चार मरीजों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन देने की संस्तुति की। इसके बाद एसडीएम, सीएमओ व डिप्टी सीएमओ स्तर से इंजेक्शन स्वीकृत किए गए, लेकिन इसका ब्योरा डीएम को देना मुनासिब नहीं समझा गया। अब यही वजह स्वास्थ्य अफसरों के लिए मुसीबत बन रही है।