इन सभी संपत्तियों पर मुख्तार और उसके लोग फर्जी तरीके से काबिज है। जब तक मुख्तार का यह खेल लोग समझ पाते, तब तक उसने इन संपत्तियों को बैंकों के हवाले करके उस पर बड़ा लोन हासिल कर लिया। लोन के इसी पैसे से उसने 50 करोड़ से अधिक की संपत्ति बना ली।
इसका विस्तार कानपुर के अलावा प्रदेश और उत्तराखंड भी किया। शत्रु संपत्ति संरक्षण संघर्ष समिति की तरफ से सोमवार को जिलाधिकारी विशाख जी को इस संबंध में एक पत्र भी सौंपा गया है। जिसमें मुख्तार की तरफ से शत्रु संपत्तियों पर फर्जी तरीके से कागजात तैयार कर उस पर लिए गए।
लोन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। इसमें लोन देने वाले बैंक की भी जांच कर कार्रवाई की बात उठाई गई है। जिलाधिकारी की तरफ से इस मामले की जांच करने का आश्वासन दिया गया है। यह मामला एसडीएम तक भी पहुंचा है।
जानिए हिबा क्या है
मुस्लिम पर्सनल लॉ में हिबा के जरिए संपत्तियों को देने का प्रावधान है, जिसे गिफ्ट में मिली संपत्ति कहा जाता है। इसकी बदौलत ही शत्रु संपत्तियों का कब्जाने का खेल किया गया है।