कानपुर। शहर के शेल्टर होम में रह रही बालिकाओं में आत्मविश्वास की कमी है। 63 फीसदी हीन भावना से ग्रसित हैं। आठ फीसदी के मन में आत्महत्या के विचार आते हैं। बालकों के मुकाबले बालिकाओं में तनाव अधिक हैं।
यह खुलासा छत्रपति शाहूजी महाराज विवि (सीएसजेएमयू) के क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग की रिपोर्ट में हुआ। इस सर्वे में राजकीय बाल गृह (बालिका) स्वरूपनगर, राजकीय बाल गृह (बालिका) नवाबगंज और राजकीय बाल गृह (बालक) कल्याणपुर में रह रहे बालक व बालिकाओं को शामिल किया गया है।
विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने यह रिपोर्ट राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को सौंपी है। कुलाधिपति के निर्देश के बाद विवि ने शेल्टर होम में रह रहे बालक-बालिकाओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सर्वे करवाया।
विवि के क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग व समाज कार्य विभाग की ओर से स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के डीन प्रो. संदीप कुमार सिंह एवं विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंका शुक्ला और टीम ने राजकीय बाल गृह में रह रहे 55 बालक व 173 बालिकाओं के बीच सर्वे किया।
इसमें 38 फीसदी बालिकाएं और 31 फीसदी बालक परिवार की वजह से तनाव में मिले। हीन भावना की वजह से 66 फीसदी बालिकाएं व 10 फीसदी बालक तनाव में दिखे।
43 फीसदी बालिकाएं संवारना चाहती हैं भविष्य
राजकीय बाल गृह में बंद 43 फीसदी बालिकाएं अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहती हैं। वह डॉक्टर, शिक्षक, पुलिस, सेना, नर्स तक बनना चाहती हैं। जबकि 39 फीसदी बालक बिजनेस करने के अलावा, शेफ, सेना, पुलिस, वकील बनकर अपना कॅरिअर बनाना चाहते हैं। टीम ने माना कि अगर सही मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिले तो इनका सपना सच हो सकता है।