कानपुर देहात। राशन कार्ड ब्योरा से करीब पांच माह पहले यह पकड़ में आया कि पति व पत्नी दोनों किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं। शासन से संदिग्ध 6138 लाभार्थियों का डेटा सत्यापन के लिए भेजा गया था। इसमें अब तक 1848 दंपती के किसान सम्मान लेने का सत्यापन हो सका है।
जिले में करीब 2.81 लाख किसान पंजीकृत हैं। प्रधानमंत्री सम्मान निधि में प्रति साल लाभार्थी को छह हजार रुपये मिलते हैं। शासन से भेजी गई रिपोर्ट में जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि लेेने वाले 6138 दंपती का ब्योरा दिया गया है। नियम के अनुसार केवल पति या फिर पत्नी को किसान सम्मान निधि का लाभ मिल सकता है। मार्च में जिले को संदिग्ध लाभार्थियों की सूची मिली। संबंधित तहसील के साथ यह सूची उपनिदेशक कृषि को भी भेजी गई। अब तक संदिग्ध डेटा में 1848 दंपती के सम्मान निधि लेने की पुष्टि हुई है।
वहीं, 4290 संदिग्ध लाभार्थियों में पति-पत्नी, मां-बेटा या फिर पिता-पुत्र के संबंध होने का सत्यापन होना शेष है। जबकि संदिग्ध लाभार्थियों का डेटा मिले करीब पांच माह हो चुके हैं। जानकारों का कहना है कि सत्यापन में राजस्व विभाग की ओर से रुचि नहीं ली गई। ऐसे में केवल कृषि विभाग सत्यापन करा रहा है। इसकी वजह से प्रक्रिया सुस्त है। उप निदेशक कृषि कार्यालय में किसान सम्मान निधि पटल देख रहे वरिष्ठ सहायक आदित्य मिश्रा ने बताया कि संदिग्ध लाभार्थियों को डेटा एक साथ कृषि व राजस्व अधिकारियों को भेजा गया था। मगर लेखपालों की ओर से सत्यापन में रुचि नहीं ली जा रही है। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी सत्यापन में लगे हैं। इसकी वजह से सत्यापन की गति सुस्त है।
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वर्जन....
किसान सम्मान निधि लेने वाले संदिग्ध लाभार्थियों का सत्यापन कराया जा रहा है। सूची के सत्यापन में सामने आया है कि कई लाभार्थी रोजगार के सिलसिले में दूसरे जिले या फिर राज्य में हैं। वहीं कई लाभार्थी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। सही सत्यापन कराने की प्राथमिकता है। इसकी वजह से समय अधिक लग रहा है। एक बार अपात्र घोषित करने पर बाद में चूक का पता चलने पर संबंधित को पात्र किया जाना संभव नहीं होगा। इसकी पोर्टल पर कोई व्यवस्था नहीं है। इसको लेकर भी अधिक सावधानी बरती जा रही है। - हरीशंकर भार्गव, उप निदेश कृषि
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शुरुआती चूक से अब पीट रहे सिर
वर्ष 2019 में किसान सम्मान निधि की शुरुआत हुई थी। योजना में लाभ उन किसानों को मिलना शुरू हुआ जिनके पास वर्ष 2019 से पहले कृषि भूमि थी। प्रति चार माह में दो हजार रुपये की किस्त लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है। शुरुआत में पति व पत्नी के सत्यापन में चूक हुई। नियम तोड़कर पति व पत्नी दोनों लाभ लेने लगे। राशन कार्ड की ई-केवाईसी में आधार से डेटा लिंक होने पर खामी सामने आयी। अब सत्यापन में अधिकारी सिर पीट रहे हैं।
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एक राशन कार्ड में संयुक्त लाभार्थी मिलने पर शुरू हुई जांच
पात्र गृहस्थी या फिर अंत्योदय राशन कार्ड में परिवार के मुखिया के साथ अन्य सदस्यों के नाम यूनिट में जुड़े रहते हैं। राशन कार्ड में ई-केवाईसी कराई गई है। इससे परिवार के मुखिया व अन्य सदस्यों के आधार नंबर का ब्योरा फीड किया गया है। इधर किसान सम्मान निधि ले रहे लाभार्थियों के ब्योरे में आधार कार्ड नंबर दर्ज है। राशन कार्ड से मिलान पर पाया गया कि परिवार के मुखिया के साथ ही सदस्य भी किसान सम्मान निधि के लाभार्थी हैं। ऐसे में एक राशन कार्ड पर यदि दो या तीन लाभार्थी हैं तो इसे संदिग्ध लाभार्थी मानकर सत्यापन शुरू किया गया।
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पति या फिर पत्नी किसी एक को लौटानी होगी धनराशि
नियम से इतर किसान सम्मान निधि हासिल की है तो पति या फिर पत्नी किसी एक को ली गई धनराशि लौटाना होगा। मगर यह साफ नहीं है कि इसे किस तरह से शासन को वापस किया जाए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पटल के वरिष्ठ सहायक आदित्य मिश्रा ने बताया कि मृतक या फिर अपात्र करार देने पर सम्मान निधि धनराशि लौटाने के लिए डायरेक्टर ऑफ एग्रीकल्चर एंड फाइनेंस कंट्रोलर यूपी के स्टेट बैंक शाखा एनबीआरआई लखनऊ के आईएफएससी कोड एसअीआईएन 0010173 पर व्यवस्था है। पति या पत्नी में से किसी एक को यदि धनराशि लौटानी है तो इसके आदेश आने पर साफ होगा।