कानपुर देहात। जिले में मानक विहीन और फिटनेस फेल करीब 55 स्कूल वाहन लगातार सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। ऐसे में मासूमों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। वहीं वैन व ई-रिक्शा मानकों को पूरा किए बिना ही बच्चों को स्कूल ले जाने व वापस लाने का काम कर रहे हैं, जो कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।
परिवहन विभाग के मुताबिक जिले में करीब 610 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें 426 बस व 184 मैक्सी कैब हैं। इनमें 126 वाहनों की फिटनेस समाप्त होने पर सूची तैयार संचालकों को नोटिस भेजी गई। इसके बाद भी जब संचालकों ने फिटनेस नहीं कराई, तो वाहनों को पकड़ सीज करने की कार्रवाई की गई। तब जाकर 71 वाहन स्वामियों ने एटीएस पहुंच मानक को पूरा कर फिटनेस का कार्य करवाया, लेकिन अभी भी 55 ऐसे संचालक हैं, जिन्होंने कार्यालय से संपर्क नहीं किया है।
यह स्थिति तब है, जब डीएम ने बैठक में स्कूली वाहनों की फिटनेस न करवाने पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त तमाम ऐसे वाहन भी जांच में सामने आए हैं, जो स्कूलों में संबंद्ध है और उनके कागज अधूरे हैं। साथ ही वैन, ई-रिक्शा में बैठकर बच्चे पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं। ऐसे मेंं इन वाहनों में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा है। निजी स्कूल संचालक बिना फिटनेस कराए ही बच्चों को वाहनों से लाने ले जाने का काम कर रहे हैं।
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30 वाहनों की उम्र पूरी, नहीं हुईं सरेंडर
जिले में संचालित स्कूलों वाहनों में 30 बसें तो ऐसी हैं, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है। इसके बाद भी संचालक इन्हें बेखौफ सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। विभाग की मानें तो संचालकों से संपर्क करने पर इन बसों का संचालन न किया जाना बताया गया है। जबकि नियमानुसार वाहनों की उम्र पूरी होने की स्थिति में उन्हें सरेंडर कर कंडम कर दिया जाता है।
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वर्जन......
स्कूली वाहनों की लगातार चेकिंग करते हुए मानक विहीन मिलने पर चालान किया जा रहा है। फिटनेस फेल वाहनों की सूची तैयार करने के दौरान 30 ऐसे वाहन मिले हैं, जिनकी उम्र पूरी हो चुकी है। वाहन स्वामियों को नोटिस जारी करने के साथ इन्हें सरेंडर करने को कहा गया है। अगर यह वाहन सड़क पर संचालित पाए जाते हैं, तो सीज करने के नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - प्रशांत तिवारी, एआरटीओ (प्रशासन)
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इन बिंदुओं पर होती है जांच
- वाहन की स्थिति
- रेडियम पट्टी
- इंजन की आवाज
- हेडलाइट
- बैक लाइट
- इंडीकेटर
- फॉग लाइट
- वाहनों के ब्रेक लगाने के सिस्टम
-स्टेयरिंग
- वाहन का कलर
- इंजन व चेचिस नंबर
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ये भी हैं मानक
- बस पर स्कूल का नाम, फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
- स्कूल बसों की अधिकतम अवधि 15 वर्ष है।
- बस में छात्रों की सूची, नाम, पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप व रूट
- चालक के अलावा अनुभवी पुरुष या महिला सहायक तैनात होने चाहिए।
- चालक और सहायक निर्धारित ड्रेस में रहे।
- वाहन का रंग पीला होना चाहिए।
- सीटिंग क्षमता अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र होने चाहिए।
- वाहन की बॉडी स्टील की और पूरी तरह बंद हो।
- सीएनजी वाहनों की तिमाही चेकिंग अधिकृत केंद्र से कराई जाए।
- प्रेशर हॉर्न प्रतिबंधित है।
- शीशों के बाहर सेफ्टी ग्रिल अनिवार्य, ताकि बच्चे सिर बाहर न निकाल सके।
- वाहन में प्राथमिक उपचार के लिए किट की व्यवस्था होनी चाहिए।