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Kanpur News: 540 जोड़ों ने लिए सात फेरे, 11 मुस्लिम जोड़ों ने कबूला निकाह

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सामूहिक विवाह - फोटो : संवाद
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कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के स्टेडियम मैदान में गुरुवार को मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 551 जोड़ों ने एक दूसरे का हाथ थामा। 540 हिंदू जोड़ों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सात फेरे लिए जबकि 11 मुस्लिम जोड़ों ने निकाह कबूल किया।
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सुबह 10 बजे से सीएसए मैदान में बैंड-बाजे की धुन पर सजी-धजी बरातें जब पंडाल की ओर बढ़ीं तो वातावरण उल्लास और हर्षोल्लास से भर उठा। प्रवेशद्वार पर तिलक, माला पहनाकर अभिनंदन और ढोल-नगाड़ों की थाप ने जोड़ों और उनके परिजनों का स्वागत किया गया। मंडपों में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया तो वर-वधू ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। मुस्लिम जोड़ों का निकाह भी संपन्न हुआ।
सामूहिक विवाह में जो भी जोड़े पहुंच रहे थे सबसे पहले उनकी ऑनलाइन बाॅयोमीट्रिक हाजिरी लगाई जा रही थी। इसके लिए सभी ब्लाॅकों के अलग-अलग स्टाल लगाए गए थे। दोपहर में अचानक सर्वर धड़ाम होने से जोड़ों की हाजिरी नहीं भर पा रही थी, इस कारण लंबी लाइन लग गई। शाम तीन बजे तक 551 जोड़ों का बॉयोमीट्रिक और फेस रिकॉग्निशन के जरिये सत्यापन किया गया।
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कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष स्वप्निल वरुण, विधायक महेश त्रिवेदी, नीलिमा कटियार, सुरेंद्र मैथानी, सरोज कुरील, एमएलसी सलिल विश्नोई, जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, उप जिलाधिकारी सदर अनुभव आदि उपस्थित रहे।

लुधियान के जगजीत ने अंकिता से रचाई शादी
लुधियाना से आए जगजीत ने श्यामनगर की अंकिता के साथ शादी रचाई। दोनों की प्रेम कहानी एक साल पहले इंस्टाग्राम चैट से शुरू हुई थी। पेशे से जिम ट्रेनर जगजीत ने बताया कि ऑनलाइन परिचय धीरे–धीरे प्यार में बदला और अंतत: दोनों ने एक-दूसरे को जीवनसाथी बनाने का फैसला किया। दोनों ने वैदिक रीति-रिवाजों से विवाह की रस्में पूरी कीं। कार्यक्रम में पहुंचे जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और सीडीओ दीक्षा जैन ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया तथा उन्हें 1100-1100 रुपये का उपहार दिया।
बगैर सत्यापन बना दिया अपात्र, भटकते रहे दिव्यांग
कार्यक्रम में दिव्यांग यशोदानगर निवासी प्रिंसी कुशवाहा और विजयनगर निवासी स्वास्तिक श्रीवास्तव भटकते हुए मिले। दोनों बोल और सुन नहीं पाते हैं। नगर निगम के जिम्मेदारों ने घर जाए बिना इनको अपात्र कर दिया था और जानकारी भी नहीं दी थी। लड़की के भाई सुमित ने बताया कि बहन के मोबाइल पर फोन आ रहा था लेकिन बोल न पाने के कारण कुछ समझ नहीं पा रही थी। जब यहां आए तो लौटाया जा रहा है। दिव्यांगों की बात को समझकर नगर निगम के कर्मियों ने तत्काल दोनों के घर भेजकर जांच कराई। जांच के बाद उनकी दोपहर बाद शादी कराई गई और दोनों घर गए।
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