फतेहपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र निगम की अदालत ने दहेज के लिए विवाहिता की हत्या कर शव यमुना में फेंकने के मामले में पिता-पुत्र को दस-दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला अदालत में पांच साल से विचाराधीन था। अदालत ने दोनों पर दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड का भुगतान न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
मामला जाफरगंज थानाक्षेत्र के गहरुखेड़ा गांव का है। गांव नवासी लल्लू की पुत्री मालती देवी की शादी थाना क्षेत्र के सहबसी गांव निवासी नंदू पुत्र बाबूलाल के साथ 2012 में हुई थी। शादी के बाद नंदू और मालती देवी को एक संतान हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता सहदेव गुप्ता ने बताया कि शादी के बाद नंदू अक्सर मालती पर मायके
पक्ष से एक लाख रुपये दिलाने का दबाव बनाता रहता था। इसे लेकर दंपति में कई बार कहासुनी और मारपीट भी हुई। मांग पूरी न होने पर 19 मई 2014 को नंदू ने पिता बाबूलाल के साथ मिलकर मालती को खाने में जहर दे दिया। इसके बाद उसका गला दबा दिया गया। शव को यमुना में फेंक दिया। हालांकि पुलिस के काफी प्रयास के बाद भी उसका शव बरामद नहीं हुआ। तब से यह मामला अदालत में विचाराधीन था। अदालत के आदेश के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया। दोनों अभी तक जमानत पर बाहर थे।