चित्रकूट। जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर की अध्यक्षता में अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना व संचालन नीति का प्रख्यापन के संबंध में समस्त ग्रामीण व शहर, स्थानीय निकायों के अधिकारियों के साथ कलक्ट्रेट सभागार में बैठक हुई। जिलाधिकारी ने कहा जहां-जहां पशु आश्रय केन्द्रों का निर्माण व अस्थाई व्यवस्था कराएं। चारा व पानी की व्यवस्था पहले से कर लें यह बहुत आवश्यक है। इसकी शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। उप जिलाधिकारी व संबंधित थाना प्रभारी यह पहले से सुनिश्चित कर लें कि गांव के लोग अपनी गायों को बांध कर रखें क्योंकि ग्राम पंचायत में तरह-तरह की विसंगतियां होती हैं। जिले में कई क्षेत्रों के ग्राम पंचायतों के किसान रबी की ही फसल पर निर्भर है। उनके फसलों का नुकसान नहीं होना चाहिए। हर ब्लाक में लगभग 10 व 12 जगहों पर पशु आश्रय बन भी गए हैं। न्याय पंचायत के अलावा बड़ी-बड़ी ग्राम पंचायतों में भी पशु आश्रय केंद्र खोले जाएं। रजिस्टर्ड गोशाला व निजी गोशालाओं का भी निरीक्षण करें। उन्होंने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका / नगर पंचायतों को निर्देश दिए कि शहर में कोई भी छुट्आ पशु न घूमने पाये।
उन्होंने कहा कि पशु आश्रय संचालन की रिपोर्ट प्रतिदिन ग्रामों की खंड विकास अधिकारी व शहर की अधिशासी अधिकारी द्वारा दिया जाएगा। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी से कहा कि मऊ व कर्वी रूट पर जो खाली वाहन आते हैं उन पर चारा लाने की व्यवस्था कराएं। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट मालिकों की एक बैठक अलग से करायी जाय। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक दशा में जनपद की हर न्याय पंचायत स्तर पर 10 जनवरी तक पशु आश्रय गृह खुल जाना चाहिए। अपर पुलिस अधीक्षक बलवंत चौधरी से कहा कि इस कार्य में सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दे दें कि पशु आश्रय संचालन में सहयोग करें। बैठक में सांसद प्रतिनिधि समेत जिलास्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
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10 जनवरी तक सभी न्याय पंचायत में खुलें गोशाला