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सीडीओ ने स्वेटर सैंपल व सभी बीईओ को तलब किया

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उन्नाव। बच्चों के दो सौ रुपये के ‘स्वेटर में भी कमीशन का खेल’ पर सीडीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए बीएसए के साथ ही समस्त बीईओ को सोमवार को कार्यालय में तलब किया है। इसके अलावा स्वेटर की गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए कुछ स्वेटरों को लैब भेजने का आदेश दिया है। इस संबंध में शनिवार को अमर उजाला में खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई है।
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जिले के 2309 प्राथमिक व 839 जूनियर विद्यालयों में 2.52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सरकार ने इनके लिए दो सौ रुपये कीमत का स्वेटर वितरण करने की व्यवस्था की है। परिषदीय स्कूलों में विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से बच्चों को स्वेटर वितरण के निर्देश हैं। मगर शिक्षकों व खंड शिक्षा अधिकारियों की जुगलबंदी से शिक्षक अपने चहेतों से स्वेटर वितरण कराकर कमीशन की कमाई कर रहे हैं।


सीडीओ प्रेमरंजन सिंह ने ‘अमर उजाला’ की खबर को संज्ञान में लेते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी बीके शर्मा को पत्र जारी कर नाराजगी व्यक्त की। सीडीओ ने बीएसए व समस्त बीईओ को सोमवार शाम 4:30 बजे कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। सीडीओ बीईओ के अलग-अलग बयान लेंगे। खंड विकास अधिकारियों को पत्र जारी कर प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों में वितरित एक-एक स्वेटर का सैंपल भी सोमवार तीन बजे के पहले कार्यालय भिजवाने के निर्देश दिए हैं। गुणवत्ता की जांच के लिए स्वेटर लैब भेजे जाएंगे।
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एसएमसी समिति की होती है जिम्मेदारी
बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए प्रदेश सरकार ने विद्यालय प्रबंध समिति की भूमिका अहम की है। अपर मुख्य सचिव ने स्वेटर वितरण के बजट में बंदरबाट न हो, इसके लिए छात्र संख्या के आधार पर स्वेटर खरीदारी की धनराशि एसएमसी खाते में भेजे जाने के निर्देश सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को दिए हैं। एसएमसी समिति की खाते से पैसे का लेनदेन करने के साथ ही स्वेटर गुणवत्ता आकलन की जिम्मेदारी तय है। एसएमसी की क्लीन चिट पर ही भुगतान होने के निर्देश है। हकीकत में व्यवस्था प्रधान शिक्षक व बीईओ के इशारे पर चलती है।
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- बीएसए को सोमवार को कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश
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