सिकंदरा(कानपुर देहात)। पर्यावरण संतुलन के लिए नदियों से खनन होना आवश्यक है। इससे जहां नदी का प्रवाह सही होता है। वहीं, बाढ़ आदि से भी बचा जा सकता है। साथ ही आसपास के गांव के लोगों को रोजगार के साधन भी मुहैया होते हैं। यह बात शुक्रवार को पर्यावरण लोक सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहीं।
शुक्रवार को तहसील सभागार में डीएम राकेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में पर्यावरण लोक सुनवाई के तहत बैठक का आयोजन किया गया। इसमें बालू खनन परियोजना निर्बरी कछार गाटा संख्या 15 में खनन करने को लेकर चर्चा हुई। इस मौके पर डीएम ने परियोजना पर चर्चा करते हुये बताया कि पर्यावरण संतुलन के लिये नदियों से खनन होना भी बेहद जरूरी है। इससे नदी का चौड़ीकरण होना रुकता है। नदी के किनारे के क्षेत्रों को बाढ़ से मुक्ति मिलती है। साथ ही रेत की आपूर्ति से राज्य की जरूरत वाली परियोजनाओं का जैसे सड़कें, इमारत, पुल आदि के निर्माण में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही उक्त नदी के किनारे के गांव में बसे लोगों को रोजगार भी मिलता है। वहीं, खनन अधिकारी ने बताया कि वैज्ञानिक स्तर से खनन का पूरा डाटा बना कर जिलाधिकारी को प्रेषित किया गया है। इस दौरान डीएम ने ग्रामीण अंचल से आए लोगों की शिकायतें सुनने के बाद जनहित के कई बिंदुओं पर खनन विभाग को अवगत कराते हुए लिखित रूप में समस्या के निदान के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि सड़कों पर पानी का छिड़काव, बालू लदे ट्रकों के ऊपर तिरपाल और ध्वनि यंत्र के प्रयोग के साथ स्कूली बच्चों व राहगीरों के निकलते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। साथ ही खनन स्थल पर श्रमिकों के लिये हेलमेट व जूते, अस्थायी आराम आश्रय, मोबाइल शौचालय, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, कचरे के डिब्बे व प्राथमिक चिकित्सा का सामान पट्टेधारी कंपनी को सुनिश्चित कराना होगा। साथ ही खनन से पूर्व ग्रामीण सड़कों की मरम्मत व बीच-बीच में सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत व समयावधि के बाद पट्टेधारी कंपनी को सड़क निर्माण कर उसकी फोटो उपलब्ध करानी होगी। वहीं, यदि किसी दशा में नियमों का पालन न किया गया तो खनन पट्टेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मौके एसडीएम विजेता, खनन अधिकारी डा. एस एस हसन सैय्यद, नूरूल हसन आदि मौजूद रहे।