अमर उजाला ब्यूरो
इटावा। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का खतरा टाइम बम की तरह है, जो बढ़ता जा रहा है और कभी भी फट सकता है। इससे बचने के लिए हमें प्रकृति के करीब रहना होगा और प्रकृति से छेड़छाड़ को बंद करना होगा। हम प्रकृति के करीब जाएंगे उतने ही स्वस्थ और सुखी रहेंगे।
शनिवार को नुमाइश पंडाल में आयोजित पर्यावरण छात्र संसद में चतुर्वेदी ने छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का शांत किया। उन्होंने कहा कि हमारा देश प्राकृतिक संसाधनों से भरा पूरा है। यहां जल, जंगल और जमीन की कमी नहीं है। कई ऋतुएं हैं जो प्रकृति के विभिन्न रूपों में दर्शन देती हैं। इसके बावजूद हम पिछड़े हुए हैं।
इसके विपरीत इजराइल जैसा छोटा सा देश यहां की आबादी सिर्फ सवा करोड़ है। हमसे कई मामलों में आगे है। जापान भी प्राकृतिक संसाधनों से दूर है फिर भी हमसे आगे है। हमारे पास प्राकृतिक संसाधन के साथ सबसे ज्यादा युवा जनसंख्या हैं। जरूरत इस बात की है हम जो भी कार्य करें उसमें देश को सर्वोपरि मानें। इससे सफलता मिलेगी और देश आगे बढ़ेगा।
महात्मा गांधी ने भी कहा था कि हमारी आवश्यकताओं के लिए प्रकृति ने भरपूर दिया है लेकिन लालच करेंगे तो पूर्ति नहीं होगी। चतुर्वेदी ने कहा कि हम लोग दिन प्रतिदिन प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। इससे ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है जो पर्यावरण को बिगड़ती है। ग्लोबल वार्मिंग का खतरा पूरे विश्व के सामने है और पर्यावरण संरक्षण से ही इस खतरे से बचा जा सकता है।
मुख्य विकास विकास अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों की बात अभिभावक मानते हैं। अब पर्यावरण संरक्षण के लिए बच्चे आगे आएं और वह अपने अभिभावकों से इस बात की जिद करें कि पर्यावरण संरक्षित करें।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कोई कार्य न करें। उन्होंने कहा कि अपने जन्मदिवस पर पौधा लगाएं और पौधों की भलीभांति देखरेख करके उसकी वर्षगांठ भी मनाएं। एसडीएम सदर सिद्धार्थ ने कहा कि सभी को मिलजुल कर पर्यावरण संरक्षण के लिए जुटना होगा। प्रधानाचार्य कैलाश यादव ने कहा कि पर्यावरण छात्र संसद एक ऐसा कार्यक्रम है जो पूरे देश में सिर्फ इटावा में ही होता है।