फतेहपुर। स्कूलों में मिडडे मील योजना के तहत बच्चों को दूध के नाम पर सफेद पानी पिलाया जा रहा है। उनकी थालियों में घटिया किस्म का चावल परोसा जा रहा है। यहां दिए जा रहे मिडडे मील की गुणवत्ता ऐसे ही जिससे उनका पोषण क्या होगा, उल्टे उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका जरूर है। ये खुलासामुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा मिडडे मील के लिए गए नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट से हुआ है। इस रिपोर्ट के आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। बीएसए ने नमूना फेल होने वाले स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को स्पष्टीकरण जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है।
जिले के 2650 परिषदीय 50 एडेड उच्च प्राथमिक के साथ 72 माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को दोपहर में एमडीएम परोसने के प्रावधान है। इसके तहत सप्ताह के प्रत्येक दिन में भोजन का अलग-अलग मेन्यू निर्धारित है। इसके अलावा सप्ताह में एक दिन बुधवार को भोजन के साथ गर्म मीठा दूध और सोमवार को मौसमी ताजा फल बांटने का प्रावधान है। इस व्यवस्था मेें नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। संचालक मानक विहीन दूध और चावल बच्चों को खाने के लिए परोस रहे हैं। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन के नाम पर असुरक्षित खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर हुआ है। रिपोर्ट आते ही बेसिक शिक्षा विभाग में हडक़ंप मच गया है। मंगलवार को बीएसए ने आननफानन में कार्रवाई के लिए लिखापढ़ी शुरू की है।
प्रभारी बीएसए राकेश सचान ने बताया कि एक स्कूल से लिया गया चावल और सात स्कूलों से भरे गए दूध के नमूने फेल हुए हैं। इनके प्रधानाचार्यों को स्पष्टीकरण जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एमडीएम में मिले रहे भोजन से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है विपरीत असर
अमर उजाला ब्यूरो