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Jalaun: 38 साल पुराना राजस्व वाद अभी तक न निपटा, रिंकू सिंह ने राजस्व परिषद से मांगी माफी

Mon, 17 Aug 2026 05:14 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
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अधिकारी रिंकू सिंह राही - फोटो : अमर उजाला
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राजस्व न्यायालयों में वर्षों से लंबित मुकदमों के निस्तारण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। संयुक्त मजिस्ट्रेट व एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने करीब 38 वर्ष पुराने राजस्व वाद के निस्तारण में हो रही देरी को लेकर राजस्व परिषद के अध्यक्ष से माफीनामा प्रस्तुत करते हुए मामले में आवश्यक मार्गदर्शन मांगा है। एसडीएम न्यायिक ने अपने पत्र में पुराने वादों के लंबित रहने के पीछे न्यायालयीन व्यवस्था और मुकदमों के प्रबंधन से जुड़ी कई खामियों का भी उल्लेख किया है।

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एसडीएम न्यायिक की ओर से राजस्व परिषद को भेजे गए पत्र में वाद संख्या टी-202606350307443, वीरेंद्र सिंह बनाम सुरेंद्र पाल सिंह आदि का उल्लेख किया गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 24 से संबंधित है। पत्र के मुताबिक संबंधित मूल वाद वर्ष 1988 से चला आ रहा है, लेकिन करीब 35 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद इसका स्वरूप समाप्त नहीं हो सका। वर्ष 2026 में इस वाद को करीब 38 वर्ष पूरे हो चुके हैं। वर्तमान न्यायालय में भी यह वाद लगभग साढ़े तीन वर्ष से लंबित है। पत्र में बताया गया कि मुकदमे में पक्षकारों को न्याय दिलाने के लिए सही मुकाम का चयन, खतौनी-नक्शा एवं धरातल पर सेक्टर के क्षेत्रफल का मिलान, गाटा संख्या और मौके की स्थिति की जांच जैसे कई बिंदुओं पर कार्रवाई आवश्यक है।

पुराने मामलों के बजाय नए वाद दर्ज होने से आंकड़ों में नहीं दिखती वास्तविक स्थिति
एसडीएम न्यायिक ने राजस्व परिषद को भेजे पत्र में न्यायालयीन व्यवस्था की एक गंभीर समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि पक्षकारों को समय से न्याय नहीं मिल पाने के बावजूद आरसीसीएमएस पोर्टल पर गाटा एवं मूल्यांकन की धारा आदि के जरिए वादों के प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से पुराने वादों के बजाय कई बार नए वाद दर्ज हो जाते हैं। इससे 38 वर्ष पुराने वादों का वास्तविक लंबित आंकड़ा सामने नहीं आ पाता। पत्र में यह भी कहा गया है कि न्यायालय की दोषपूर्ण प्रणाली, प्रशासन और राजस्व परिषद द्वारा पुराने वादों एवं वाद निस्तारण की समीक्षा समय-समय पर किए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है।

 
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25 अगस्त तक मांगी गई रिपोर्ट
एसडीएम न्यायिक ने हदबंदी से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं पूरी कर 25 अगस्त 2026 तक परगनाधिकारी की सत्यापन आख्या सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा 31 अगस्त 2026 तक नायब तहसीलदार राजस्व निरीक्षक समेत आवश्यक अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है। इसके बाद मौके पर सुनवाई, पैमाइश और अन्य जरूरी प्रक्रिया पूरी कर न्यूनतम समय में न्याय सुनिश्चित करने की योजना रखी गई है।
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