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खेती से ही व्यवसाय को जोड़ें किसान

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फतेहपुर। थरियांव कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को ‘उत्थान अ-स्टार्टअप, स्वयं रोजगार संभावनाएं, समस्या एवं उसके निदान’ विषय पर कार्यशाला हुई। इसे अमर उजाला, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और सीएसए कानपुर ने मिलकर आयोजित किया। युवा किसानों, महिलाओं को खेती के जरिये फसलों को व्यावसायिक बनाने पर जोर दिया गया। उन्हें बताया गया कि कैसे वह उत्थान अ-स्टार्टअप से जुड़कर अपना अच्छा व्यवसाय कर सकते हैं। उन्हें प्रशिक्षण व लोनिंग दोनों के लिए भी प्रेरित किया गया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी डायरेक्टर कृषि प्रसार अनिल कुमार पाठक व सीएसए के सह निदेशक डॉ. आरबी सिंह, केवीके प्रभारी डॉ. आर के सिंह ने किया। सह निदेशक ने कहा कि किसान खेती तो करते हैं, लेकिन सही रास्ते का चयन न होने से लाभ नहीं उठा पाते। युवा किसान स्वत: रोजगार अपनाएं। समूह बनाकर खेती करें, जिस गांव में क्लस्टर बनाकर खेती होगी, वहां के किसानों को घर बैठे मंडी के रेट मिल जाएंगे। आढ़ती खुद किसानों के गांव में आकर खरीदारी करेंगे। कृषि वैज्ञानिक साधना वैश्य ने कहा कि फल व सब्जियों का मूल्य संवर्धन (फल, सब्जियों का रूप परिवर्तन)करें। इससे अधिक दाम मिलेंगे। टमाटर की खेती करने वाले किसान सीधे मंडी में न बेच कर उसका सॉस, सूप, आलू वाले फ्लेवर चिप्स बनाकर पैकिंग करें। इससे मंडियों से अच्छा दाम मिलेगा। मशरूम पैदा कर जो लोग सीधे बिक्री करते हैं, उसमें कटपीस में बहुत अधिक मात्रा में छंट जाता है। इससे नुकसान होता है। इस कटपीस के टुकड़ों का अचार बनाकर बिक्री किया जा सकता है, जो अधिक मात्रा में बिकेगा।
मुख्य अतिथि डिप्टी डायरेक्टर कृषि प्रसार अनिल कुमार पाठक ने कहा कि उत्थान से जुड़कर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ाने का उपक्रम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सीटू मैनेजमेंट योजना से कृषि यंत्र खरीदने वाले किसानों को 80 फीसदी छूट दिया जाना था, लेकिन जिन किसानों के समय पर बिल नहीं अपलोड हो पाए हैं, उनके बिल निरस्त हो गए। सरकार ने उनके बिल में 50 फीसदी छूट देने का आदेश दिया है। जल्द ही किसानों के खाता में धनराशि भेजी जाएगी। जिला उद्यान अधिकारी रामसिंह यादव ने कहा कि स्टार्टअप का मतलब है कि लक्ष्य बनाना। बिना लक्ष्य के सफलता नहीं मिलती। उद्यान विभाग से अनुदान पर मिनी प्याज भंडार बनवाए जाते हैं। इसमें 1.75 लाख रुपये की लागत आती और 87500 रुपये का अनुदान दिया जाता है। इससे प्याज को दो से तीन महीने तक के लिए स्टोर किया जा सकता है। इस मौके पर प्रगतिशील किसान अनूप सिंह यादव, भीम सिंह, मोतीलाल यादव, ज्ञानप्रकाश, कल्लू सिंह, दिलीप सिंह, कमलेश लोधी, मलखान सिंह, रामसिंह, छेदीलाल, यदुवंश, रामेश्वर लोधी, राहुल सिंह, प्रगतिशील किसान मनीष तिवारी मौजूद रहे।
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