घाटमपुर (कानपुर)। भीतरगांव क्षेत्र में वर्ष 2007-08 में किरोसिन तेल घोटाले की जांच का जिन्न दस वर्ष के लंबे अंतराल के बाद फिर चिराग से बाहर निकल आया है। मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को सौंपी गई है। गुरुवार की दोपहर संबंधित एजेंसी के इंस्पेक्टर अतुल जेटली की अगुवाई में एक टीम तहसील मुख्यालय में बने आपूर्ति कार्यालय आई और मामले से संबंधित रिकार्ड खंगाले।
बसपा शासनकाल में भीतरगांव के राशन कोटेदारों को साढ़ कसबा स्थित वार हीरो आयल कंपनी से किरोसिन तेल का उठान करवाया जाता था। आयल कंपनी के खिलाफ वितरण में अनियमितता की शिकायतें मिलने पर जांच कराई गई थी। 27 राशन कोटेदारों की दुकानें निरस्त की गई थीं। जांच में पाया गया कि राशन कोटेदारों से मिलीभगत कर कंपनी से ही राशन कार्डधारकों का मिट्टी का तेल ब्लैक में बेंच दिया जाता है। साढ़ स्थित कंपनी के खिलाफ शिकायतें मिलने पर सतर्कता टीम ने कंपनी में छापा मारकर ब्लैक में बेचने को लोड किया गया टैंकर किरोसिन तेल पकड़ा था। जिसमें वार हीरो आयल कंपनी के मालिक गुरुशरण सिंह कौर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
सपा शासनकाल में हुईं थी बहाल
वार हीरो आयल कंपनी और राशन कोटेदारों की साठगांठ से चल रहे किरोसिन तेल के खेल की जांच में दोषी पाए गए 27 राशन कोटेदारों की दुकानों को सपा शासनकाल में बहाल कर दिया गया था। भीतरगांव क्षेत्र के राशन कोटेदारों ने आयल कंपनी के मालिक के पक्ष में अदालत में शपथपत्र भी दाखिल किए थे। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था।
इधर, गुरुवार को जब आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा की टीम अचानक घाटमपुर आई और पूर्ति निरीक्षक कार्यालय पहुंचकर संबंधित प्रकरण के दस्तावेज तलब कर खंगालने शुरू किए तो सनसनी मची। पूर्ति निरीक्षक अनुज कुमार ने बताया कि जांच टीम एक घंटे तक रुकी और संबंधित प्रकरण से संबंधित अभिलेखों की जांच-पड़ताल कर तथ्य जुटाए।