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प्रवासी आए 30 हजार, नौकरी मिली सिर्फ 159 को, गलत नहीं संघ प्रमुख का केंद्र और प्रदेश सरकार को किया गया इशारा

Sat, 12 Sep 2020 03:07 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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बेरोजगारी - फोटो : social media
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कानपुर आए संघ के सर संघचालक डा. मोहन भागवत का प्रवासी श्रमिकों को रोजगार के मामले में सरकारों की ओर किया गया इशारा कोई गलत नहीं है। अलग-अलग राज्यों से शहर लौटे हजारों प्रवासी श्रमिक रोजगार से दूर हैं। इसका अंदाजा केवल इस बात से लगाया जा सकता है कि रोजगार कार्यालय के माध्यम से इतने महीनों में केवल 159 प्रवासियों को ही रोजगार दिलाया जा सका है। 
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लॉकडाउन के दौरान 30086 प्रवासी श्रमिक कानपुर नगर लौटे थे। सरकार के निर्देेश पर जिला प्रशासन ने रोजगार कार्यालय के माध्यम से राहत मित्र एप पर इनका पंजीकरण का कार्य शुरू किया था। इसमें प्रवासी श्रमिकों की योग्यता के अनुसार उनका पंजीकरण किया गया था। इस ऐप पर अब तक 20256 प्रवासियों का पंजीकरण किया गया जिसमें 17786 अकुशल और 247 कुशल श्रमिक हैं।

प्रवासियों को रोजगार दिलाने को सरकार ने कुछ महीने पहले सेवामित्र एप पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें महज एक सितंबर तक 17 ही पंजीकरण हुए हैं। विभाग के अफसरों का कहना है कि यह प्रक्रिया इतनी लंबी है कि आवेेदन करने और पुलिस वेरिफकेशन में ही दो महीने लग जाते हैं। विभाग के पास अब 76 और आवेदन वैरीफिकेशन के बाद पहुंचे हैं जिनका जल्द पंजीकरण किया जाएगा।
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893 का नियोजकों से कराया संपर्क
लॉकडाउन के बीच सेवायोजन कार्यालय ने पांच आनलाइन रोजगार मेलों का आयोजन किया। इसमें नियोजकों के माध्यम से 893 प्रवासी श्रमिकों का संपर्क विभाग ने कराया। इसमें कंपनी के मानकों पर खरे उतरे 159 प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया।

प्रवासी भी कम जिम्मेदार नहीं
रोजगार मेला सेल के प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों की सूची अलग-अलग कंपनियों को उपलब्ध कराई गई लेकिन जब नियोजक उन्हें साक्षात्कार के लिए फोन करते हैं तो प्रवासी श्रमिक कहते हैं कि उन्होंने कोई आवेेदन ही नहीं किया। इसके अलावा बड़ी-बड़ी कंपनियां रोजगार देने के बजाय अपना स्टाफ कम कर रहे हैं। 

लौट चुके हैं बड़ी संख्या में प्रवासी
लिंकिंग जॉब्स के सीईओ सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान शहर आए हजारों श्रमिकों में से 50 फीसदी से अधिक प्रवासी अपनी पुरानी जगहों पर काम के लिए भी लौट गए हैं। टेक्नीशियनों, मशीन आपरेटरों को यहां मनरेगा का काम मिल रहा था। ऐसे में उन्होंने लौटना ही बेहतर समझा।
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