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Kanpur News: जिले में बिना एनओसी के चल रहीं 245 फैक्टरियां

Thu, 01 May 2025 12:50 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। बिना फायर एनओसी के फैक्टरियों में उत्पादन गतिविधि पर आग लगने से जान माल के नुकसान का खतरा रहता है। इसके बाद भी मानक दरकिनार कर जिले में 245 फैक्टरियां बिना एनओसी के संचालित की जा रही हैं। इसमें 112 फैक्टरियों को अग्निशमन विभाग कई बार नोटिस भी दे चुका है।
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जिले के रनियां व जैनपुर में छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 300 फैक्टरियां संचालित हैं। इसमें कई फैक्टरियों में प्रति शिफ्ट श्रमिकों की संख्या 100 या इससे अधिक भी रहती है। फैक्टरियों में आग से बचाव के इंतजाम हों और फायर एनओसी ली जाए। इसको लेकर अग्निशमन विभाग की ओर से 112 फैक्टरियों को कई बार नोटिस दी गई। हालांकि नोटिस मिलने के बाद भी इन फैक्टरियों में आग से बचाव के जरूरी संसाधन जुटाने और फायर एनओसी लेने की पहल नहीं हो सकी है।
ऐसे में इन फैक्टरियों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना है। जानकारों का कहना है कि 133 ऐसी फैक्टरियां हैं जिन्हें अग्निशमन विभाग की ओर से नोटिस नहीं दी जा सका है। कई फैक्टरियों में बाहर से ताला बंद रहता है। मगर अंदर उत्पादन गतिविधि चालू रहती है।
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रनियां के रायपुर में ऑटो पार्ट (थ्री व्हीलर) बनाने वाली फैक्टरी के रंगाई प्लांट में मंगलवार को आग लग गई थी। इस फैक्टरी में भी न फायर एनओसी है और न ही यहां आग बुझाने के जरूरी इंतजाम मिले। फैक्टरी में करीब 90 श्रमिक काम करते हैं। घटना के समय 32 श्रमिक मौजूद थे। शॉर्ट-सर्किट से लगी आग कुछ देर में फैल गई। गनीमत रही कि कोई श्रमिक हताहत नहीं हुआ। जबकि आग से छह लाख का नुकसान होने की बात कही गई। पूरे मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने एसपी को रिपोर्ट सौंपी है।
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वर्जन......
ऑटो पार्ट्स फैक्टरी बिना एनओसी संचालित हैं। यहां आग से बचाव के इंतजाम भी नहीं मिले। बिना एनओसी संचालित 112 फैक्टरियों को नोटिस दी जा चुकी है। पूरी रिपोर्ट एसपी को सौंपी गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार कार्यवाही की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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छह श्रमिकों की जलकर मौत, बिना एनओसी के फिर संचालित रही गद्दा फैक्टरी
कानपुर देहात। रनियां औद्योगिक क्षेत्र के खानचंद्रपुर में बीते साल 21 सितंबर को बिना एनओसी संचालित फोम गद्दा फैक्टरी में आग लगने से छह श्रमिकों की जलकर मौत हो गई थी। मामले में फैक्टरी संचालकों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दो फैक्टरी संचालकों की गिरफ्तारी हुई। फैक्टरी भी बंद करा दी गई थी। मगर कुछ दिन बाद ही फैक्टरी संचालक ने बैंक ऋण का हवाला देकर फैक्टरी का ताला खुलवाने का अनुरोध किया। इस पर फैक्टरी का ताला खोल दिया गया। इस घटना को सात माह बीतने के बाद भी फोम गद्दा फैक्टरी संचालकों ने विभाग से फायर एनओसी लेने की जरूरत नहीं समझी। बता दें कि बिना एनओसी संचालित फैक्टरियों की बिजली आपूर्ति बंद कराई जा सकती है। वहीं सीजर की कार्रवाई भी प्रशासन कर सकता है। हालांकि अग्निशमन विभाग की ओर से इन दोनों कार्रवाई के लिए अब तक कोई रिपोर्ट जिला प्रशासन को नहीं दी गई है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि फोम गद्दा बनाने वाली फैक्टरी संचालित है। मगर एनओसी नहीं लगी गई है। संवाद

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फैक्टरी के लिए अग्निसुरक्षा मानक
डेढ़ लाख लीटर पानी भंडारण क्षमता का भूमिगत टैंक जरूरी है। वहीं बीस हजार लीटर पानी भंडारण क्षमता का ओवर हेड टैंक भी होना चाहिए। टैंक से पानी बाहर निकालने के लिए पांच पंपिंग सेट चाहिए। इसमें दो बिजली चालित अधिक क्षमता के पंप और दो बिजली चालित कम क्षमता के पंप लगाने का नियम है। एक पंप डीजल चालित होना चाहिए। हर कार्य शेड में फव्वारा (स्फ्रिंकलर), स्मोक अलार्म, मैनुअल अलार्म, प्रति तीस मीटर क्षेत्र में होजरील व हाइडेंट होना चाहिए। जबकि प्रति सौ वर्ग मीटर क्षेत्र में एस्टिंग्यूशर (अग्निशमन यंत्र) भी जरूरी हैं।
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बिना एनओसी चल रहे 70 से अधिक होटल
दो हाईवे जिले से निकले हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्र भी है। इधर एक निजी कंपनी दो से तीन कमरों के होटल की फ्रेंचायजी दे रही है। इस प्रकार करीब 70 से अधिक होटल जिले में संचालित है। इनमें किसी की फायर एनओसी नहीं है। अग्निसुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम न होने से यहां आग लगने की घटना पर भारी जानमाल के नुकसान का खतरा बना है। संचालित सभी होटलों के संचालकों को अग्निशमन विभाग नोटिस दे चुका है। इसके बाद भी स्थिति जस की तस है।
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38 सरकारी अस्पताल बिना एनओसी संचालित
जिले में सीएचसी व पीएचसी समेत 38 सरकारी अस्पताल में फायर एनओसी नही हैं। इसका आशय है कि इन अस्पतालों में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम नही हैं। वहीं 70 निजी अस्पताल की फायर एनओसी है। नव निर्मित मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल व कुंभी स्थित एकेडमिक भवन की भी फायर एनओसी है।
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