कानपुर। बिल्हौर तहसील के औरंगपुर सांभी गांव में वर्ष 2008 में नियमों की अनदेखी कर किए गए 233 कृषि भूमि पट्टों को 17 साल बाद निरस्त कर दिया गया। एडीएम (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय ने गुरुवार को पूरी जमीन को दोबारा ग्रामसभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
वर्ष 2008 में तत्कालीन एसडीएम ने ग्रामसभा की 235 बीघा कृषि भूमि 233 लोगों के नाम आवंटित की थी। इसमें आरोप लगे थे कि पात्रता, चयन प्रक्रिया और राजस्व नियमों की अनदेखी कर पट्टे दिए गए। शिकायत के बाद तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने सभी पट्टे निरस्त कर दिए थे। इसके खिलाफ पट्टाधारकों ने 2013 में कमिश्नर कोर्ट में अपील की। कमिश्नर ने मामले को गुण-दोष के आधार पर सुनवाई के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय भेज दिया।
वर्ष 2019 से चल रही सुनवाई के बाद एडीएम (वित्त एवं राजस्व) डॉ. विवेक चतुर्वेदी ने सभी पक्षों और राजस्व अभिलेखों का परीक्षण कर सभी पट्टे निरस्त करने का आदेश दिया। उन्होंने बताया कि अब संबंधित 235 बीघा भूमि ग्रामसभा के अभिलेखों में दर्ज कर आगे की राजस्व कार्रवाई की जाएगी।