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22 सीसीटीवी कैमरे खराब मिले

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कानपुर/चित्रकूट। जेल में तीन खूंखार अपराधियों के अंत के पीछे गैंगवार कम साजिश की आशंका अधिक हो गई। कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिससे तमाम अहम सवाल उठने लगे हैं। जेल में आधे सीसीटीवी कैमरे खराब हैं। जहां पर खूनी खेल हुआ वहां के कैमरे नहीं चल रहे थे। लिहाजा उसके राज हमेशा के लिए दफन हो गए। हाई सिक्योरिटी बैरक से अफसर और सुरक्षाकर्मी नदारद थे। इन सबका एक साथ होना, साजिश की तरफ इशारा कर रहा है।
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जेल में कुल 30 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। केवल 8 कैमरे ही चल रहे थे, बाकी के 22 खराब पड़े हैं। जो कैमरे बंद पड़े हैं इसमें वो कैमरे भी शामिल जो घटना स्थल के पास लगे थे। सीएम को जो जांच रिपोर्ट अफसरों ने सौंपी है, उसमें इसका जिक्र है। यही वजह है कि जेल अधीक्षक और जेलर पर कार्रवाई हुई। हैरानी की बात ये है कि कुख्यात अपराधियों के बंद होने के बावजूद इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है। आशंका है कि ये सब साजिश के तहत किया गया है। उच्चस्तरीय जांच में स्पष्ट हो सकेगा। हाई सिक्योरिटी बैरकों में मेराज और अंशु दीक्षित बंद थे। इन बैरकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक-एक डिप्टी जेलर की होती है। यहां पर डिप्टी जेलर की तैनाती तो थी, लेकिन वो ड्यूटी पर नहीं थे। वार्डेन और अन्य सुरक्षाकर्मी भी वहां से नदारद थे। इतने सारे इत्तफाक एक साथ कैसे हो सकते हैं, ये गले नहीं उतर रहा है। जांच में सुरक्षा में भारी चूक सामने आई है। ये लापरवाही है या किसी साजिश का हिस्सा ये नहीं पता। मगर ये तथ्य बेहद अहम है।
अंशु के पास कारतूसों का जखीरा था
अंशू दीक्षित के पास पिस्टल कैसे पहुंची इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिला है। ,सूत्रों के मुताबिक बीस राउंड से ऊपर अंशू ने फायर किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतने कारतूस उसके पास कैसे पहुंचे। आशंका यह भी है कि पिस्टल के साथ उसको दो मैगजीन उपलब्ध कराईं गईं। जिनका उसने इस्तेमाल किया। अभी तक की जांच में एक बात साफ हुई कि पिस्टल किसी बाहरी शख्स नहीं दी है। कोई अंदर का शख्स शामिल है।
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जेल के दो माह से सीसीटीवी कैमरे खराब
जिला जेल रगौली को शासन प्रशासन हाई सिक्योरिटी की जेल बताता है, लेकिन दो माह से अंदर के सभी सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। कैमरों को बनवाने को कई बार पत्राचार भी हुआ, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। जेल में सुरक्षाकर्मी भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। कई अधिकारी तो अवकाश पर हैं जिसका भी अपराधियों ने फायदा उठाया। यह बात सीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट से उजागर हुई है। टीम में मंडल के कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह, आईजी के. सत्यनारायण और डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी शामिल हैं। टीम ने दो बार जेल का दौरा कर 25 लोगों से पूछताछ की। इसके बाद शुक्रवार की देर रात को चार पेज की रिपोर्ट शासन को भेजी। (संवाद)
कैमरों की खराबी का ठीकरा कंपनी पर फोड़ा
जेल के खराब सीसीटीवी कैमरों का ठीकरा जेल प्रशासन ने संबंधित कंपनी पर फोड़ा है। जांच टीम को बताया कि शिकायतों के बाद भी जेल के कैमरों को सही नहीं कराया गया था। दो महीने पहले सभी कैमरे एक साथ खराब हो गए थे। मेंटीनेंस की जिम्मेदारी कैमरे लगाने वाली एजेंसी की है। अब सवाल ये है कि शिकायतों के बाद भी कैमरे सही क्यों नहीं हुए। संबंधित एजेंसी पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया। मुख्य गेट से प्रवेश से लेकर अंदर के गेट प्रवेश द्वार तक के कैमरा सही हैं, लेकिन अंदर के कैमरे खराब चल रहे हैं।
पिस्टल और मैग्जीन कैसे पहुंची, इन सबकी जानकारी की जा रही है। जांच जारी है, जैसे ही पता चलेगा तो रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल, हेड वार्डर संजय खरे, वार्डर हरीशंकर राम और एक पीएसी जवान को निलंबित कर दिया गया है।
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-के. सत्यनारायणा, आईजी, चित्रकूटधाम मंडल
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