कानपुर देहात। जिले में देवोत्थानी एकादशी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। लोगों भगवान विष्णु का पूजन पूरे विधि-विधान से किया। गन्ने व सिंघाडे़ का भोग लगाया। किसानों ने खेतों में पूजन करने के बाद गन्ने की कटाई शुरू कर दी।
आषाढ़ माह की हरियशनी एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में शयन करने जाते हैं। इसके बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को भगवान श्रीहरि योग निद्रा से जाग जाते हैं। वहीं लोग इस एकादशी को भगवान शालिग्राम व तुलसी के विवाह के रूप में मनाते हैं। इस दिन गन्ना की खेती करने वाले किसान परंपरा के तहत देवोत्थानी एकादशी पर गन्ने का पूजन कर कटाई का काम शुरू कर देतेे हैं। लोगों ने भगवान विष्णु को नए वस्त्र पहना कर पूजन किया। इसके साथ ही दीपावली पर रखे गए गोधन को पलट दिया गया। अब इन्हेें कार्तिक पूर्णिमा के दिन खेतों में डाला जाएगा। किसानों में ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से फसलों की पैदावार बढ़ जाती है।
रसूलाबाद प्रतिनिधि के अनुसार, देवोत्थान एकादशी के पावन पर्व पर महिलाओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा प्रसाद में सिंघाड़े, गन्ने के टुकड़े वितरित किए। वहीं कुछ महिलाओं ने भगवान विष्णु तथा तुलसी जी की आरती उतार कर पूजन किया जबकि क्षेत्र के कठारा, असालतगंज, लालू, तिस्ती, रतनपुर, महेरा आदि गांव में महिलाओं ने तुलसी व शालिग्राम का पूजन किया।