अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। परिषदीय स्कूलों की रंगाई-पुताई कराकर गुरुजन फंस गए। स्कूलों की रंगाई-पुताई में अपनी मेहनत की कमाई लगा चुके हैं, लेकिन सत्र समाप्त होने में कुछ दिन बचे हैं और रकम नहीं मिली। अधिकारियों के गोद लिए स्कूलों की रंगाई-पुताई में तो 25 से 30 हजार रुपये खर्च होने का दावा किया जा रहा है। शिक्षक सर्व शिक्षा कार्यालय में बजट के लिए चक्कर लगाकर थक चुके हैं।
जिले में 1903 प्राथमिक और 747 उच्च प्राथमिक मिलाकर कुल 2650 परिषदीय स्कूल हैं। प्रत्येक प्राथमिक स्कूल की रंगाई पुताई के लिए हर साल 5000 और उच्च प्राथमिक स्कूल के लिए 7500 रुपये बजट मिलता है। 15 सौ रुपये प्रति अतिरिक्त कक्षा कक्ष अलग से मिलता है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में सिर्फ डेढ़ महीने बचा है, लेकिन रंगाई पुताई के नाम पर स्कूलों में रकम आवंटित नहीं हुई है।
खास बात तो यह है कि अधिकारियों के गोद लिए स्कूलों में राजस्थान के पेंटर बुलाकर रंगाई-पुताई कराई गई थी। शिक्षकों की मानें, तो इस तरह की रंगाई पुताई में एक स्कूल में 25 से 30 हजार रुपये खर्च हुए हैं। जून में अधिकारियों के दबाव में ज्यादातर शिक्षक स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई करा चुके हैं, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिला है।
बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि वित्तीय वर्ष के अंत में सभी तरह के अवशेष बजट शासन से जारी होते हैं। ऐसे में 31 मार्च तक बजट आने की उम्मीद है।