उन्नाव। शिक्षामित्रों ने मंगलवार को बांगरमऊ में एक निजी कार्यक्रम में पहुंची बेसिक शिक्षामंत्री को घेरने का प्रयास किया। इस पर शिक्षा मंत्री ने लखनऊ में सीएम के साथ शिक्षामित्रों के मुद्दे पर बैठक होने की बात कही और ज्ञापन लेकर रवाना हो गईं। मंत्री की बेरुखी से झल्लाए शिक्षामित्र बांगरमऊ कस्बे के चौराहे पर सड़क पर बैठ गए। जिससे जाम लग गया। पुलिस के समझाने पर आधे घंटे बाद हालात सामान्य हो सके। वहीं बीएसए कार्यालय में धरने पर बैठे शिक्षामित्रों ने सीएम की सद्बुद्धि के लिए हवन कर सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मांगपत्र भेजा।
समायोजन रद्द होने के सातवें दिन भी शिक्षामित्र आंदोलनरत रहे। मंगलवार सुबह 11 बजे तक बीएसए कार्यालय में सैकड़ों शिक्षामित्र एकत्र हो चुके थे। शिक्षामित्रों ने स्पष्ट नीति जारी न होने पर मंच से सरकार को जमकर कोसा। इसके अलावा पूर्व की सपा सरकार पर भी जमकर हमला बोला इस दौरान बांगरमऊ के एक स्कूल में बेसिक शिक्षामंत्री अनुपमा जायसवाल के आने की जानकारी हुई तो दो सैकड़ा से अधिक शिक्षामित्र वहां पहुंच गए।
दोपहर के करीब एक बजे शिक्षामंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं तो शिक्षामित्र नारेबाजी कर आगे बढ़े। पुलिस व निजी सुरक्षा कर्मियों ने जैसे-तैसे मंत्री को कार्यक्रम स्थल पहुंचाया। शिक्षामित्रों के तेवर देख मंत्री करीब बीस मिनट बाद बाहर निकल पड़ीं। मंत्री ने शिक्षामित्रों से धैर्य बनाए रखने के साथ ही सरकार के साथ होने का आश्वासन दिया। वहीं शिक्षामित्रों ने नीति स्पष्ट करने की बात कहते हुए मंत्री को घेरने का प्रयास किया।
मंत्री शिक्षामित्रों के मुद्दे पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ बैठक होने की बात कहकर आगे बढ़ गई। इससे खफा शिक्षामित्र बांगरमऊ चौराहे पर जमीन पर बैठ गए, जिससे जाम लग गया। यहां सीएम की सद्बुद्धि के लिए हवन भी किया। पुलिस के समझाने पर करीब आधे घंटे बाद शिक्षामित्र सड़क से हटे। इस दौरान राकेश बाजपेई, माणिक शुक्ला, आनंद यादव, तारा सिंह यादव भी शामिल रहे। वहीं बीएसए कार्यालय में दीपनारायण त्रिपाठी, कुलदीप शुक्ल, अजय प्रताप सिंह, पुरुषोत्तम सिंह, प्रदीप यादव फैसले के खिलाफ मोर्चा खोले रहे।
बंद स्कूलों के खुले ताले
छह दिनों से बंद पड़े जिले के 138 स्कूलों के ताले मंगलवार को खुल गए। बीईओ ने दूसरे स्कूलों के शिक्षकों को अटैच कर शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लाने की तरफ कदम बढ़ाया है। प्रभारी बीएसए नसरीम फारूकी ने बताया कि बंद स्कूलों में शिक्षण कार्य शुरू हो गया है। जल्द ही अन्य समस्याओं का भी हल निकाल लिया जाएगा।
स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से असमंजस
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने के साथ ही आगे की कार्रवाई की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार पर डाली है। शिक्षामित्र इस बात से ज्यादा परेशान हैं कि वेतन मिलेगा या मानदेय पर वापसी होगी। शिक्षामित्र ही नहीं विभागीय अधिकारी भी सरकार से स्पष्ट दिशा निर्देश न होने से असमंजस में हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षामित्रों की मूल स्कूलों में वापसी होगी या फिर समायोजित स्कूलों में कार्य करेंगे। जुलाई का वेतन मिलेगा कि नहीं जैसे कई सवाल हैं।
-धरनास्थल पर किया हवन, पूर्व की सपा सरकार पर भी हमलावर रहे शिक्षामित्र
-योगी सरकार से नया अध्यादेश लाकर नौकरी सुरक्षित करने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो